25 साल का छत्तीसगढ़: क्या खोया, क्या पाया? — “विजन आज तक” की खास चर्चा में उठे सवाल

25 साल का छत्तीसगढ़: क्या खोया, क्या पाया? — “विजन आज तक” की खास चर्चा में उठे सवाल

रायपुर,
छत्तीसगढ़ राज्य आज अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर बने इस राज्य ने पिछले ढाई दशकों में विकास, संघर्ष और बदलाव का बड़ा सफर तय किया है। इसी विषय पर विजन आज तक द्वारा आयोजित विशेष चर्चा में साहित्यकार गिरीश पंकज, औद्योगिक विश्लेषक संतोष जैन और सामाजिक चिंतक डॉ. सुधीर शर्मा बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रत्ना पांडे ने किया।


चर्चा में क्या बोले विशेषज्ञ?

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने राज्य की उपलब्धियों के साथ-साथ उन चुनौतियों को भी रेखांकित किया, जिनसे अब भी प्रदेश जूझ रहा है।

गिरीश पंकज ने कहा कि “छत्तीसगढ़ लोकतंत्र की दृष्टि से कई मामलों में पीछे रह गया है। राज्य में मानवाधिकार आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत है।”

संतोष जैन ने भविष्य की संभावनाओं पर बात करते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ अब फिल्म और मनोरंजन उद्योग का उभरता केंद्र बनने जा रहा है। इससे रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा मिलेगी।”

वहीं कार्यक्रम की संचालिका रत्ना पांडे ने कहा कि उन्होंने “14 साल से निरंतर ‘विजन आज तक’ के माध्यम से जन-जागरूकता और संवाद का मंच संभाला है, और यह प्रदेश के लोकतांत्रिक विकास का हिस्सा है।”


क्या पाया छत्तीसगढ़ ने? (उपलब्धियाँ)

ऊर्जा का हब: छत्तीसगढ़ अब देश के प्रमुख बिजली उत्पादक राज्यों में शामिल है।

खनिज और स्टील इंडस्ट्री: रायगढ़, कोरबा और जगदलपुर अब राष्ट्रीय औद्योगिक नक्शे में मजबूत स्थान रखते हैं।

धान का कटोरा: कृषि क्षेत्र में राज्य ने रिकॉर्ड उत्पादन और एमएसपी व्यवस्था के जरिए किसानों को मजबूती दी।

बेहतर सड़क और एयर कनेक्टिविटी: फोरलेन, पुल और एयरपोर्ट विस्तार ने राज्य को और अधिक जोड़ने का काम किया।

जनजातीय संस्कृति का संरक्षण: बस्तर दशहरा और लोककलाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिली।

क्या खोया? (चुनौतियाँ)

नक्सलवाद की चुनौती: सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में हिंसा अब भी विकास की राह में अवरोध बनी है।

पर्यावरणीय क्षरण: खनन से जंगल, वन्यजीव और आदिवासी जीवन गहरे प्रभावित हुए।

रोजगार की कमी: उद्योगों के बावजूद स्थानीय युवाओं को अवसर पर्याप्त नहीं मिले।

किसानी की अनिश्चितता: धान उत्पादन रिकॉर्ड है, लेकिन बाजार और मूल्य स्थिर नहीं।

राजनीतिक उतार-चढ़ाव: बदली नीतियों और सरकारों के कारण योजनाओं में निरंतरता प्रभावित हुई।


आगे की राह क्या? (भविष्य एजेंडा)

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का तेज विकास
उद्योगों में स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता
हरित उद्योग, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप आधारित अर्थव्यवस्था
शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा

25 सालों के इस सफर में छत्तीसगढ़ ने अपनी पहचान, संसाधनों और विकास के माध्यम से एक मजबूत राज्य के रूप में खुद को स्थापित किया है। लेकिन अगला सवाल यह है—आने वाले 25 साल छत्तीसगढ़ किस दिशा में जाएगा?

राज्य का भविष्य अब योजनाओं, नीतियों और जनता की भागीदारी पर निर्भर करेगा।

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