कस्टम मिलिंग घोटाले का मास्टरमाइंड पूर्व IAS अनिल टुटेजा — EOW ने कोर्ट में पेश किया 1500 पेज का चालान

कस्टम मिलिंग घोटाले का मास्टरमाइंड पूर्व IAS अनिल टुटेजा — EOW ने कोर्ट में पेश किया 1500 पेज का चालान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कस्टम मिलिंग घोटाले में ईओडब्ल्यू (EOW) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष अदालत में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और होटल कारोबारी अनवर ढेबर के खिलाफ करीब 1500 पेज का पूरक चालान पेश किया है। दोनों फिलहाल रायपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं।

इससे पहले फरवरी 2025 में ईओडब्ल्यू ने राइस मिल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर और मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी के खिलाफ पहला चालान दाखिल किया था। नए चालान में एजेंसी ने अनिल टुटेजा को घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है, जिसने राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्रपूर्वक इस घोटाले को अंजाम दिया।

20 करोड़ की अवैध वसूली का खुलासा

चालान के अनुसार, राइस मिलरों से 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अवैध वसूली की जाती थी। इस वसूली के लिए मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता था ताकि मिलर्स के बिल रोक दिए जाएं और उन्हें रिश्वत देने को मजबूर किया जा सके। इस तरह 20 करोड़ रुपये की वसूली की पुष्टि हुई है।

अनवर ढेबर का टुटेजा से गठजोड़

ईओडब्ल्यू ने बताया कि प्रभावशाली कारोबारी अनवर ढेबर न केवल शराब घोटाले में सक्रिय था बल्कि पीडब्ल्यूडी और वन विभाग जैसे अन्य विभागों पर भी उसका गहरा प्रभाव था।

आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान मिले डिजिटल सबूतों से यह साफ हुआ कि अनवर ढेबर ने राइस मिलरों से अवैध रकम वसूलकर अनिल टुटेजा के लिए संग्रह, खर्च और निवेश किया।

कांग्रेस कोषाध्यक्ष पर भी जांच

घोटाले में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ जांच जारी है।

जनवरी 2024 में दर्ज हुई थी FIR

ईडी की कार्रवाई के बाद ईओडब्ल्यू ने 29 जनवरी 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। आरोपियों में रोशन चंद्राकर, मनोज सोनी, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, सिद्धार्थ सिंघानिया और रामगोपाल अग्रवाल शामिल हैं।

140 करोड़ की अवैध वसूली का अंदेशा

जांच में सामने आया कि वर्ष 2020-21 से पहले मिलर्स को कस्टम मिलिंग के बदले प्रति क्विंटल 40 रुपये दिए जाते थे, जिसे कांग्रेस सरकार ने बढ़ाकर 120 रुपये कर दिया। इसी बढ़ोतरी के बाद अफसरों और एसोसिएशन पदाधिकारियों ने 140 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की।

माना जा रहा है कि ईओडब्ल्यू आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य बड़े नामों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।

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