रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले सभी किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य कर दिया है।
खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने बताया कि एग्रीस्टैक पोर्टल भारत सरकार द्वारा विकसित एक यूनिफाइड एग्रीकल्चर डेटाबेस है, जिसमें किसानों की भूमि और आधार लिंक्ड जानकारी दर्ज की जाती है। पंजीकरण के बाद किसानों को एक यूनिक फार्मर आईडी (Unique Farmer ID) दी जाएगी, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र किसानों तक पहुँचेगा।
रीना कंगाले ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिले। एग्रीस्टैक पोर्टल पर ई-केवाईसी आधारित पंजीयन से पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
पिछले वर्ष राज्य के 25.49 लाख किसानों ने धान विक्रय किया था, जबकि इस वर्ष अब तक 21.47 लाख किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन करा लिया है। शेष किसान 31 अक्टूबर 2025 तक अपने निकटतम सहकारी समिति या निर्धारित केंद्र में जाकर पंजीयन करा सकते हैं। इसके लिए सभी समितियों और जिला कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
राज्य सरकार का दावा है कि यह नई व्यवस्था इतनी चौकस और सटीक होगी कि “परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा।”
एग्रीस्टैक को सरकार ने डिजिटल क्रांति की दिशा में मील का पत्थर बताया है, जो छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को और अधिक किसान हितैषी, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाएगा।
गौरतलब है कि इस वर्ष राज्य के 20 हजार ग्रामों में से 13,879 ग्रामों में डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा किया गया है। इन सर्वे रिपोर्टों और मैनुअल गिरदावरी का 2 से 14 अक्टूबर तक ग्राम सभाओं में पठन किया जा रहा है। पंचायत भवनों में सर्वे सूची का प्रदर्शन (चस्पा) भी किया गया है, ताकि किसान अपनी जानकारी सत्यापित कर सकें।
इस पूरी प्रक्रिया की सतत निगरानी जिला कलेक्टरों, खाद्य अधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है। शासन का मानना है कि यह पहल “डिजिटल एग्रीकल्चर और गुड गवर्नेंस” की दिशा में राज्य का एक सशक्त और दूरदर्शी कदम साबित होगी।

