टॉप माओवादी माड़वी हिड़मा एनकाउंटर में ढेर, मां की अपील भी न मानी

टॉप माओवादी माड़वी हिड़मा एनकाउंटर में ढेर, मां की अपील भी न मानी

– बस्तर में लाल आतंक का पर्याय बन चुके एक करोड़ के इनामी टॉप माओवादी कमांडर माड़वी हिड़मा को सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया है।
वीओ- छत्तीसगढ़–आंध्र प्रदेश बॉर्डर के अल्लुरी सीताराम जंगल में रविवार सुबह हुई मुठभेड़ में हिड़मा, उसकी पत्नी और पर्सनल गार्ड सहित छह बड़े नक्सली मारे गए। मौके से दो AK-47, एक रिवॉल्वर और एक पिस्टल बरामद हुई है।

हिड़मा कई बड़ी नक्सली घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा है—2010 का ताड़मेटला हमला और 2013 का झीरम घाटी हत्याकांड इसी के नाम पर दर्ज हैं।


हिड़मा का अंत: मां की अपील भी बेअसर

बीते 10 नवंबर को उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा अचानक सुकमा के अतिसंवेदनशील गांव पूर्वर्ती पहुंचे थे। यहां जनचौपाल में हिड़मा और उसके साथी लीडर बारसे देवा के परिजन भी शामिल हुए।
इस दौरान हिड़मा की मां माड़वी पुंजी ने खुले मंच पर अपने बेटे को सरेंडर कर हिंसा छोड़ने की भावुक अपील की थी। उन्होंने कहा था—
“परिवार, गांव और समाज को छोड़कर जंगल में हथियार लेकर भटकने से किसी का भला नहीं हो रहा।”

लेकिन हिड़मा ने मां की अपील नहीं मानी और फिर जंगल में सक्रिय रहकर हिंसा का रास्ता जारी रखा।


सुकमा में सबसे बड़ी सफलता

सीमा क्षेत्र में रविवार सुबह जवान सर्चिंग पर थे, तभी पहले से घात लगाए नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। करीब एक घंटे चली इस मुठभेड़ में जवानों ने मोस्ट वांटेड हिड़मा और उसके दस्ते को ढेर कर दिया। मारे गए नक्सलियों में—

हिड़मा (CC मेंबर)

पत्नी मडगाम राजे हिड़मा

पर्सनल गार्ड देवा

लकमल (DCM)

कमलू (PPCM)

मअल्ला (PPCM) शामिल हैं।

ताड़मेटला हमला: 76 जवान शहीद

6 अप्रैल 2010 को सुकमा के ताड़मेटला में देश के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली हमला हुआ था। हिड़मा ने ही इस हमले की पूरी प्लानिंग की थी। घात लगाकर किये गए इस हमले में 76 CRPF जवान शहीद हुए थे।

झीरम घाटी हत्याकांड का मास्टरमाइंड

25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला किया था। इस हमले में—

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल,

विद्याचरण शुक्ल,

महेंद्र कर्मा,

उदय मुदलियार
सहित लगभग 30 नेता मारे गए थे।
इस हमले का मास्टरमाइंड भी हिड़मा ही माना जाता था।

गांव पहुंचकर सरकार ने दिखाई भरोसे की राह

गृह मंत्री विजय शर्मा ने पूर्वर्ती गांव पहुंचकर ग्रामीणों से बात की, आधारभूत सुविधाओं का जायज़ा लिया और नक्सली लीडरों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया—
“सरकार विकास और शांति चाहती है, हिंसा छोड़ने वालों का स्वागत है।”

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