राजधानी रायपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। 22 वर्षीय मोहम्मद शाकिब की सात दिन तक मौत से जूझने के बाद अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि शराब पार्टी के बहाने बुलाकर उसके दोस्तों ने पहले विवाद किया और फिर पेट्रोल डालकर उसे जिंदा जला दिया। घटना के बाद से परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठा रहा है।
परिजनों के अनुसार, 12 जुलाई की शाम शाकिब का स्कूल का दोस्त सोनू उसे घर से लेकर गया था। बताया गया कि शराब पार्टी के लिए बुलाया गया था। दोनों सुयश अस्पताल के पीछे हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास एक खाली मैदान में पहुंचे, जहां किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि इसी दौरान शाकिब और उसकी बाइक पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई।
आग की लपटों में घिरा शाकिब बुरी तरह झुलस गया, जबकि उसकी बाइक मौके पर ही जलकर राख हो गई। सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां सात दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद रविवार को उसने दम तोड़ दिया।
मृतक की बहन शहरबान ने दावा किया है कि सोनू और शाकिब के बीच पहले से वाहन को लेकर विवाद चल रहा था और दोनों के संबंध खराब थे। परिवार का आरोप है कि इसी रंजिश के चलते सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया गया। परिजनों का यह भी कहना है कि एक युवक ने अपनी गलती स्वीकार करने की बात कही थी, लेकिन अब तक पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहा है। परिवार का आरोप है कि घटना के एक सप्ताह बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। मृतक के चचेरे भाई मोहम्मद वाजिद अली ने कहा कि पुलिस ने न तो मौके की गंभीरता से जांच की और न ही समय रहते सख्त कार्रवाई की।
शाकिब की मौत के बाद परिजन और बड़ी संख्या में रिश्तेदार सरस्वती नगर थाने पहुंचे और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। राजधानी में हुई इस सनसनीखेज घटना ने कानून-व्यवस्था और पुलिस जांच की रफ्तार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सवाल यह है कि यदि परिजनों के आरोप सही हैं, तो सात दिन तक आरोपी खुलेआम कैसे घूमते रहे? और क्या शाकिब को समय रहते न्याय मिल पाएगा? पुलिस जांच के निष्कर्ष और गिरफ्तारी पर अब पूरे शहर की नजर टिकी हुई है।

