संभू ईशर गवरा की लोकगाथा पर आधारित शोध पुस्तक का हुआ विमोचन…

संभू ईशर गवरा की लोकगाथा पर आधारित शोध पुस्तक का हुआ विमोचन…

आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और आस्था के प्रतीक संभू ईशर गवरा पर आधारित शोध पुस्तक ” संभू ईशर गवरा: शोध-सृजन की लोकगाथा” का विमोचन रायपुर प्रेस क्लब मे रविवार को गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर समाज के प्रबुद्धजन, शोधकर्ता, साहित्यकार एवं सामाजिक प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

पुस्तक के लेखक एवं शोधकर्ता हिरामाल धर्मपाल कोंडोपे ने अपने शोध कार्य के माध्यम से संभू ईशर गवरा जीवन, लोकदर्शन, सांस्कृतिक योगदान तथा आदिवासी समाज में उनके प्रभाव को विस्तार से प्रस्तुत किया है। पुस्तक में लोककथाओं, ऐतिहासिक संदर्भों, सांस्कृतिक साक्ष्यों और सामाजिक परंपराओं का समावेश किया गया है।

वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक केवल एक शोध दस्तावेज नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पुस्तक में प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, लोकआस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

समारोह में उपस्थित अतिथियों ने लेखक के शोध प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक एवं शोध कार्य समाज की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

“संत ईश्वर नवरा : शोध-सृजन की लोकगाथा” पुस्तक का भव्य विमोचन, आदिवासी संस्कृति की विरासत को मिलेगा नया आयाम

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