कुलगाम आतंकी हमला – क्या कश्मीर में फिर लौट रहा है प्रवासी मज़दूरों को निशाना बनाने का दौर?

कुलगाम आतंकी हमला – क्या कश्मीर में फिर लौट रहा है प्रवासी मज़दूरों को निशाना बनाने का दौर?

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मज़दूरों दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना की हत्या केवल एक आतंकी घटना नहीं,बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना बन गई है. जिस समय अमरनाथ यात्रा के लिए पूरे कश्मीर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था का दावा किया जा रहा था,उसी दौरान एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे निहत्थे मज़दूरों को निशाना बनाया जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आतंकियों को इन मज़दूरों की मौजूदगी पहचान और कार्यस्थल की जानकारी कैसे मिली?यदि सांसद प्रमोद तिवारी के आरोप सही हैं कि हमलावरों ने पहले उनका राज्य और जाति पूछी तो यह हमला केवल आतंकवाद नहीं बल्कि भय और सामाजिक विभाजन फैलाने की सुनियोजित कोशिश भी माना जा सकता है.

घटना ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार लगातार दावा करती रही है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में आतंकवाद कमजोर हुआ है और सामान्य स्थिति बहाल हुई है. लेकिन पहलगाम की घटना के बाद कुलगाम हमला यह संकेत देता है कि आतंकवादी अब भी सॉफ्ट टारगेट तलाशकर अपने अस्तित्व का संदेश देना चाहते हैं.

महबूबा मुफ़्ती और भाजपा नेता अल्ताफ़ ठाकुर जैसे विरोधी राजनीतिक ध्रुवों के नेताओं द्वारा भी सुरक्षा चूक की बात उठाना बताता है कि मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि वास्तविक सुरक्षा चिंता का विषय है.अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद आतंकी वारदात होना खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है.

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि देना संवेदनशील कदम है लेकिन यह मुआवज़ा उन परिवारों का दर्द कम नहीं कर सकता जिन्होंने रोज़ी-रोटी कमाने गए अपने परिजनों को खो दिया।

बाईट मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

कुलगाम हमला केवल दो मज़दूरों की हत्या नहीं है, बल्कि यह कश्मीर में सुरक्षा खुफिया तंत्र और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सरकारी दावों की कड़ी परीक्षा है.यदि इस हमले के दोषियों को जल्द पकड़कर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो यह संदेश जाएगा कि आतंकवादी अब भी कश्मीर में भय का माहौल बनाने में सक्षम हैं.
सरकार के लिए चुनौती केवल आतंकियों को मारना नहीं, बल्कि यह साबित करना है कि कश्मीर में काम करने आने वाला हर नागरिक सुरक्षित है.

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