ग़ज़ा सिटी में मंगलवार को दर्द, ग़म और बिछड़ने की टीस से भरा एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर आंख को नम कर दिया।
वर्ष 2023 में ग़ज़ा युद्ध के शुरुआती दौर में एक रिहायशी इमारत पर हुए इसराइली हमले में मारे गए 112 लोगों का सामूहिक जनाज़ा निकाला गया।
दो सप्ताह तक चले खोज अभियान के दौरान मलबे से निकाले गए शवों को कतारबद्ध रखा गया।
प्रत्येक शव को फ़लस्तीनी झंडे में लपेटा गया था, जबकि कई शवों पर मृतकों की तस्वीरें भी रखी गई थीं। इसके बाद परिजन भारी मन से अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने के लिए कब्रिस्तान की ओर रवाना हुए।
बताया जा रहा है कि ग़ज़ा में यह अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक जनाज़ा है।
शोकसभा में शामिल लोगों की आंखों में वर्षों का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
अली अबू शारिया ने भावुक होकर कहा कि अपनों को खोने का दर्द बहुत पहले महसूस होना चाहिए था, लेकिन अब कम से कम उन्हें सम्मानपूर्वक दफ़नाने का अवसर मिला है, जिससे दुख के बीच कुछ सुकून मिल सकता है।
मृतकों में अबू शारिया और हस्सायना परिवारों के 40 बच्चे, 38 महिलाएं और सात दिव्यांगजन शामिल थे। दोनों परिवार एक ही बड़े कबीले से जुड़े थे।
इनकी मौत 22 नवंबर 2023 को ग़ज़ा शहर के साबरा इलाके में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में हुई थी।
सामूहिक जनाज़े के दौरान पूरे इलाके में मातम पसरा रहा। परिजनों की सिसकियां, नम आंखें और अपनों की याद में उठती दुआएं इस बात की गवाही दे रही थीं कि युद्ध की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों और मासूम बच्चों को चुकानी पड़ती है।

