Mirzapur The Movie Review: बड़े पर्दे पर फीका पड़ा गुड्डू-कालीन भैया का भौकाल, जानें कैसी है ‘मिर्जापुर: द मूवी’

Mirzapur The Movie Review: बड़े पर्दे पर फीका पड़ा गुड्डू-कालीन भैया का भौकाल, जानें कैसी है ‘मिर्जापुर: द मूवी’

एंटरटेनमेंट डेस्क। ओटीटी की चर्चित क्राइम-थ्रिलर सीरीज मिर्जापुर के प्रशंसकों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। एक्सेल एंटरटेनमेंट और अमेजन MGM स्टूडियोज की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी (कालीन भैया), अली फजल (गुड्डू पंडित) और दिव्येंदु (मुन्ना भैया) एक बार फिर अपने लोकप्रिय किरदारों में नजर आए हैं। हालांकि, फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतरती नहीं दिखती।

कहानी में नया ट्विस्ट, लेकिन कमजोर पड़ता है असर

फिल्म की कहानी 2018 के घटनाक्रम से शुरू होती है, जहां सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंचती है। इस बार मिर्जापुर की गद्दी के लिए संघर्ष केवल अंदरूनी नहीं रह जाता, बल्कि बाहरी ताकतें भी मैदान में उतरती हैं। रवि किशन के किरदार बब्बन को कहानी में बड़ा स्थान दिया गया है, जिसकी नजर मिर्जापुर की सत्ता पर है।

हालांकि कहानी में नए प्रयोग किए गए हैं, लेकिन कई जगह यह उलझी हुई नजर आती है। सीरीज के लोकप्रिय किरदारों की मौजूदगी के बावजूद पटकथा दर्शकों को पूरी तरह बांधने में सफल नहीं होती।

अभिनय में अली फजल और पंकज त्रिपाठी का दम

फिल्म में अली फजल ने प्रभावशाली अभिनय किया है और उनके किरदार में नया आयाम देखने को मिलता है। पंकज त्रिपाठी हमेशा की तरह अपने संयमित और दमदार अभिनय से प्रभावित करते हैं। वहीं दिव्येंदु का मुन्ना भैया वाला किरदार इस बार सीमित नजर आता है, जो सीरीज के प्रशंसकों को निराश कर सकता है।

रवि किशन को फिल्म में भरपूर स्क्रीन स्पेस मिला है और उन्होंने अपने किरदार के साथ न्याय करने की कोशिश की है। हालांकि उनके बढ़ते प्रभाव के कारण गुड्डू और मुन्ना जैसे लोकप्रिय किरदार कुछ हद तक बैकफुट पर चले जाते हैं।

निर्देशन और स्क्रीनप्ले में खामियां

फिल्म का पहला हाफ अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन दूसरा हाफ खिंचा हुआ महसूस होता है। कई दृश्य और गाने कहानी की गति को धीमा करते हैं। क्लाइमेक्स भी जरूरत से ज्यादा लंबा लगता है, जिससे फिल्म का असर कमजोर पड़ता है।

निर्देशक गुरमीत सिंह ने कहानी को बड़े कैनवास पर पेश करने की कोशिश की है, लेकिन कई जगह फोकस बिखरता हुआ दिखाई देता है।

फैसला

अगर आप मिर्जापुर सीरीज के कट्टर प्रशंसक हैं, तो फिल्म आपको मिश्रित अनुभव दे सकती है। गुड्डू पंडित, कालीन भैया और मुन्ना भैया का वह भौकाल, जिसने सीरीज को लोकप्रिय बनाया था, बड़े पर्दे पर पूरी ताकत से नजर नहीं आता। फिर भी फिल्म एक बार देखी जा सकती है।

रेटिंग: ★★½ (2.5/5 स्टार)

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