क्या हृदय रोग ज्यादा उम्र में होता है. क्या ये युवाओं की समस्या नहीं है? कई लोगों के मन में इस तरह के सवाल उठते हैं.
अक्सर 20-30 साल के युवा सोचते हैं कि उन्हें इसका ख़तरा नहीं है.
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में युवाओं और मझोली उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़ते दिखे हैं.
हार्ट अटैक के लिए हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, डायबिटीज, धूम्रपान, नींद की कमी, लगातार मानसिक तनाव और कम शारीरिक गतिविधि जैसी वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं.
अगर कम उम्र में ही ये समस्याएं जीवन का हिस्सा बन जाएं तो आगे चलकर ये कई बीमारियों की वजह बन सकती हैं. साथ ही, यह जोखिम बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी शरीर में बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि हृदय रोग होने की वजहों पर पहले से ध्यान देना जरूरी है.
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक़, हृदय रोग का जोख़िम बढ़ाने वाली वजहों को जल्दी पहचानने के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच अहम है.
हमारी जीवनशैली में आ रहे बदलाव की वजह से भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं.
वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर जानते हैं कि 40 साल की उम्र से पहले किन लोगों को हार्ट चेक-अप की जरूरत होती है. कौन सी जांच सही में उपयोगी है और किन लक्षणों को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए.
क्या सभी को ईसीजी कराना चाहिए?
बिना किसी लक्षण और खास हृदय रोग के जोखिम वाले हर युवा को नियमित रूप से ईसीजी यानी इकोकार्डियोग्राफी कराने की जरूरत नहीं होती.
अगर सीने में दर्द, दिल की धड़कन तेज होना, बेहोशी, सांस फूलना या डॉक्टर को जांच के दौरान कोई संदिग्ध लक्षण दिखाई दे, तो इन जांचों की जरूरत पड़ सकती है.
हृदय रोग का जोखिम पता लगाने के लिए कई तरह की जांच होती. लेकिन हर व्यक्ति को सभी जांच कराने की जरूरत नहीं होती.
विशेषज्ञों के मुताबिक़, 30-40 साल की उम्र के ज्यादातर स्वस्थ लोगों के लिए नियमित ब्लड प्रेशर जांच, ब्लड शुगर टेस्ट और लिपिड प्रोफाइल जैसी बुनियादी जांच ज्यादा उपयोगी हो सकती हैं.
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंज प्रिव्हेंशन (सीडीसी) का कहना है कि हार्ट अटैक के जोख़िम को समझने के लिए कोलेस्ट्रॉल की जांच अहम है.
हालांकि जोख़िम ज्यादा होने पर एचबी1एसी, लिपोप्रोटीन (ए) यानी एलपीए और कुछ मामलों में एपीओबी जैसी जांचों पर भी विचार किया जा सकता है.
हाल की लिपिड मैनेजमेंट गाइडलाइंस में एलपीए जैसे मार्कर पर भी ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है.
डॉ. लक्ष्मण गायकवाड ने मिडिया को इस बारे में विस्तार से बताया है. वह एम्स हॉस्पिटल, डोंबिवली में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट हैं.
उन्होंने कहा, “काम का तनाव, व्यायाम की कमी, बढ़ता वजन, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की समस्याएं अब कम उम्र में दिखाई देने लगी हैं. कई बार शुरुआत में इनके कोई लक्षण नहीं होते. इसलिए कम उम्र से ही हार्ट हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है.”
20 से 30 साल की उम्र में कैसा ख़तरा हो सकता है
हाई ब्लड प्रेशर, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी की वजह से कम उम्र में हृ़दय रोग के लक्षण दिख सकते हैं. इसके साथ ही असंतुलित आहार, पर्याप्त नींद न लेना और लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव भी कम उम्र ख़राब हृदय स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार हो सकता है.
कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत बढ़ा हुआ हो सकता है.
हमने डॉ. गायकवाड से पूछा कि ऐसे में ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच किस उम्र से शुरू करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “ब्लड प्रेशर की जांच हर वयस्क व्यक्ति की नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा होना चाहिए. कोलेस्ट्रॉल की जांच भी वयस्क उम्र में शुरू की जा सकती है और इसके बाद कितनी बार जांच करानी है, यह व्यक्ति के जोखिम पर निर्भर करता है. अगर परिवार में कम उम्र में हृदय रोग या बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल की समस्या रही है तो नियमित जांच की जरूरत होती है.”
परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो तो क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक़ किसी व्यक्ति के माता-पिता या परिवार के किसी अन्य सदस्य को कम उम्र में हृदय रोग या हार्ट अटैक हुआ है तो उस व्यक्ति में भी जोखिम ज्यादा हो सकता है
डॉ. लक्ष्मण गायकवाड कहते हैं, “परिवार में हृदय रोग का इतिहास एक अहम वजह हो सकता है. अगर किसी व्यक्ति के माता-पिता या परिवार के किसी अन्य सदस्य को कम उम्र में हृदय रोग या हार्ट अटैक हुआ है तो उस व्यक्ति में भी जोखिम ज्यादा हो सकता है. ऐसी स्थिति में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और जोखिम बढ़ाने वाले कारणों की जांच जल्दी करानी चाहिए.कुछ मामलों में आनुवंशिक रूप से होने वाले कोलेस्ट्रॉल संबंधी गड़बड़ियों की जांच भी जरूरी हो सकती है.”
वह कहते हैं, “40 साल की उम्र से पहले ही अगर सीने में भारीपन या दर्द हो, ख़ासकर दर्द हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल रहा हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अचानक सांस फूलना, पसीना आना, चक्कर आना या बेहोशी, सीने में धड़कन महसूस होना जैसे लक्षण भी अहम हैं. ऐसे लक्षण अचानक शुरू हों तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए.”
डॉ. गायकवाड़ कहते हैं, ” यह गलत धारणा है कि 40 साल की उम्र से पहले हृदय रोग का ख़तरा नहीं होता. हर युवा को हृदय की विशेष जांच कराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन कम उम्र से ही ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, वजन और जीवनशैली पर ध्यान देने से भविष्य में हृदय रोग के जोखिम को पहचानने और उसे कम करने में मदद मिल सकती है.”

