पुणे एक्सप्रेस-वे पर पिछले 30 घंटों से लगे भीषण जाम ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
कई किलोमीटर लंबे इस जाम में हजारों वाहन चालक और यात्री घंटों से फंसे हुए हैं। भारी वाहनों की अधिक आवाजाही, सड़क मरम्मत कार्य और कुछ स्थानों पर हुए छोटे हादसों के कारण हालात और गंभीर हो गए हैं।
जाम में पर्यटक, नौकरीपेशा लोग, मरीज, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। यात्रियों को खाने-पीने का पानी, दवाइयों और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों ने बताया कि वे पूरी रात गाड़ियों में ही बैठे रहे, ईंधन खत्म होने की कगार पर पहुंच गए और मोबाइल फोन की बैटरी भी जवाब देने लगी।
गर्मी और उमस के चलते कुछ यात्रियों की तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आई हैं, जबकि कई मरीज समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से अतिरिक्त परेशानी झेल रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।
ट्रैफिक पुलिस वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था कर रही है और भारी वाहनों को अस्थायी रूप से रोककर छोटे वाहनों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, मौके पर एंबुलेंस, पानी के टैंकर और खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है ताकि जाम में फंसे लोगों को राहत मिल सके।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे बिना अत्यावश्यक कारण के एक्सप्रेस-वे पर यात्रा न करें और जारी ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें। सोशल मीडिया पर जाम की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग अपनी पीड़ा और प्रशासन से मदद की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ट्रैफिक प्रबंधन को मजबूत करने, सड़क कार्यों की बेहतर योजना बनाने और आपातकालीन हालात में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने की जरूरत है। फिलहाल प्रशासन का दावा है कि हालात पर धीरे-धीरे काबू पाया जा रहा है, लेकिन जाम पूरी तरह खुलने तक यात्रियों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं।

