बिहार में ‘वोट चोरी’ के आरोप और वीडियो वायरल — विपक्ष ने चुनाव आयोग पर हमला तेज किया

बिहार में ‘वोट चोरी’ के आरोप और वीडियो वायरल — विपक्ष ने चुनाव आयोग पर हमला तेज किया

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के बाद विपक्षी नेताओं और पार्टियों ने मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और “वोट चोरी” के आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर आने वाले कई वीडियोज़ में दर्शक कह रहे हैं कि सतही रूप से मतदान सामान्य दिख रहा है, मगर कहीं पुलिस या स्थानीय प्रशासन के दबाव से मतदाताओं को मतदान से रोका जा रहा है, कहीं बूथ तक पहुंच ही बाधित की जा रही है और कहीं पहले से फर्जी वोट डाल दिए गए — ऐसी शिकायतें सामने आई हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी बिहार में वोट चोरी के आरोपों को सार्वजनिक रूप से दोहराया और चुनाव आयोग पर सख्त हमला बोला। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर मतदाता-लिस्ट में गड़बड़ी और वोट हटाए जा रहे हैं, और लोगों से अपील की कि वे अपने वोट की रक्षा करें। राहुल गांधी के तीखे बयानों को हाल के रैली दौरों और प्रेस बयान में दर्ज किया गया है।

वहीं, महागठबंधन व अन्य विपक्षी दलों ने कई वीडियो और सबूत चुनाव आयोग (EC) और मीडिया के सामने रखे हैं—उनका दावा है कि इन वीडियोज़ में पुलिस या पक्षपाती लोगों द्वारा मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुँचने से रोका जा रहा है या बूथ पर दबाव बनाया जा रहा है। पार्टियों ने आयोग से तुरंत कार्रवाई और निरीक्षण की मांग की है।

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन ने कहा है कि पहला चरण शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और प्रदेश में रिकॉर्ड टर्नआउट दर्ज हुआ है — आयोग ने 1st फेज़ के दौरान 64% से अधिक भागीदारी का provisional आंकड़ा जारी किया है और मतदान सामान्य रूप से संपन्न होने का दावा किया है। आयोग ने मत प्रतिशत और ईवीएम-रिप्लेसमेंट इत्यादि के आंकड़े भी सार्वजनिक किए हैं।

हालाँकि, विपक्ष की चिंताएँ और वायरल वीडियोज़ राजनीतिक तनाव बढ़ा रहे हैं — कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और एनालिस्ट्स ने सुझाव दिया है कि उच्च वोटिंग प्रतिशत के बीच भी स्थानीय स्तर पर व्यवहारिक समस्याएँ और शिकायतें हो सकती हैं, जिनकी स्वतन्त्र जांच होना आवश्यक है। साथ ही चुनाव आयोग पर राहुल गांधी की बार-बार की लगाए शिकायतों पर भी कुछ मीडिया संस्थानों ने तथ्य-जाँच रिपोर्ट प्रकाशित की हैं और आयोग ने कुछ दावों का खंडन/तथ्य-जाँच भी की है।

क्या होने की संभावना है — आगे क्या होगा?

  1. विपक्ष ने वीडियो और सबूतों को लेकर चुनाव आयोग से त्वरित जांच और स्थानीय निरीक्षण की माँग की है — अगर आयोग जांच का आदेश देता है तो प्रभावित बूथों की पुनः जाँच याiminal प्रक्रियाएँ शुरू हो सकती हैं।
  2. आयोग और सरकार द्वारा मामले की नज़रअंदाज़ करने का आरोप राजनीतिक गर्माहट को और बढ़ा सकता है — विपक्ष इसे बड़ा सार्वजनिक मुद्दा बनाकर रैलियाँ और कानूनी कार्रवाई दोनों कर सकता है।

वायरल वीडियोज़ और विपक्षी आरोपों ने बिहार के चुनावी माहौल में शंका और तनाव दोनों पैदा कर दिए हैं। रिकॉर्ड-टर्नआउट के दावों के बीच स्थानीय स्तर पर उठने वाली शिकायतों की स्वतन्त्र और पारदर्शी जाँच लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिहाज़ से आवश्यक दिखती है। जिन भी मतदाताओं के पास वीडियो या प्रत्यक्ष प्रमाण हों उन्हें स्थानीय निर्वाचन अधिकारी या आयोग के हेल्पलाइन पर दर्ज कराना चाहिए — और मीडिया तथा निगरानी संस्थाओं की भूमिका भी इस समय निर्णायक होगी।

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