बाबू इस बच्चे के पिता का नाम है – रोटी कपड़ा और मकान !

बाबू इस बच्चे के पिता का नाम है – रोटी कपड़ा और मकान !

शेख अंसार की क़लम से…

कहते हैं रूपहले पर्दे पर प्रदर्शित होने वाली कतिपय कहानियां समाज का आईना होती है। लेखक निर्देशक हरिकृष्णागिरी गोस्वामी उर्फ़ मनोज कुमार उर्फ़ भारत कुमार द्वारा निर्मित फिल्म रोटी कपड़ा और मकान 18 अक्टूबर 1974 को भारत के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी। मजदूरों के जीवन पर आधारित वह भी निर्माणी महिला मजदूर को केन्द्रीय भूमिका में रखकर बनाई गई थी। इस फिल्म की मुख्य पात्र में से एक थी, तुलसी ( मौसमी चटर्जी ) आज जिस तरह भारत में लाखों – करोड़ों डिग्रीधारी बेरोजगारी के आलम में भटक रहे हैं, फ़िल्म में उस जमाने की बेरोजगारी का प्रतिनिधित्व करते मनोज कुमार भी अपनी डिग्री संभाले काम की तलाश में भटक रहे थे। उस जमाने की बेरोजगारी की शक्ल – ओं – सूरत में और आज की बेरोजगारी के हालात में तनिक भी परिवर्तन नही हुआ है, बल्कि पहले के मुकाबले आज का बेरोजगारी और विराट रूप अख्तियार कर लिया है।

फिल्म के मुख्य पात्र भारत कुमार द्वारा मजदूर की भूमिका निबाह रही तुलसी के लिए यह सम्बोधन में मेरी मजदूर साथी कहना मन को भावविह्वल और झंकृत करता है …!

मेरा मकसद रोटी कपड़ा और मकान फिल्म की स्टोरी बताना – लिखना नही है। मैं हमारे देश के एक अच्छे कलाकार को जिनके जीवन, राजनीतिक आस्था का मैं कत्तई हामी नही हूं। एक अच्छे कलाकार के नाते उनके निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं। बहरहाल,‌ हमारे देश भारत के सूरत – ए – हाल में रोटी कपड़ा और मकान शब्दावली बेहद जनस्वीकार्य लगती है। इस फिल्म में मरहूम जानी बाबू की वह कव्वाली मंहगाई … मंहगाई … मंहगाई सुनते ही एकदम से सरकार के खिलाफ लड़ाई में उतर जाने का आह्वान करती है।

सर्वहारा की भूमिका निबाह रही तुलसी लाला ( सीएस दुबे ) के किनारे की दुकान में उधारी में आटा लेने जाती है, वहां उसके दरबेनुमा झोपड़ी का मालिक नेकीराम ( मदनपुरी ) कपड़े दुकान का मालिक ( अब्दुल ) पहुंच जाते हैं। रोटी कपड़ा और मकान के मालिक तुलसी को रोटी कपड़ा और मकान देने के एवज में तुलसी का बलात्कार कर मासूम तुलसी को मसल देते हैं। फिल्म के कालान्तर में मनोज कुमार जब मौसमी चटर्जी से पूछते इस बच्चे का बाप कौन है ?‌ तुलसी की भूमिका अदा कर रही मौसमी चटर्जी कहतीं हैं बाबू रोटी कपड़ा और मकान

हरिकृष्णागिरी गोस्वामी उर्फ़ मनोज कुमार उर्फ़ भारत कुमार को विनम्र श्रद्धांजलि!

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