रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने मंगलवार को रायपुर की विशेष अदालत में छठा चालान पेश किया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, घोटाले में कई निजी कंपनियों, अधिकारियों और छुपे हुए लाभार्थियों की मिलीभगत सामने आई है।
विजय भाटिया को मिले 14 करोड़
EOW की जांच में सामने आया कि ओम साई बेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया को करीब 14 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने अलग-अलग खातों और डमी डायरेक्टरों के जरिए ये राशि निकाली।
संजय, मनीष और अभिषेक को मिले 11 करोड़
वहीं, नेक्सजेन पावर इंजिटेक कंपनी से जुड़े संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को 11 करोड़ रुपये मिले।
FL-10 लाइसेंस के जरिए हुआ घोटाला
EOW के मुताबिक, विदेशी शराब की खरीद-बिक्री और सप्लाई के लिए जारी किए गए FL-10 A/B लाइसेंस का दुरुपयोग कर कंपनियों ने घोटाला किया।
FL-10 A लाइसेंस से देशी-विदेशी शराब की बिक्री की जा सकती है।
FL-10 B लाइसेंस से राज्य के शराब निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की शराब लेकर विभाग को बेचना संभव है।
सिंडिकेट बनाकर बनाई गई व्यवस्था
जांच में सामने आया कि तत्कालीन अधिकारी अनिल टूटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया। इस सिंडिकेट के जरिए शासकीय शराब दुकानों में सप्लाई पर कमीशन, डिस्टलरी से अतिरिक्त शराब निर्माण, अवैध बिक्री और विदेशी शराब की सप्लाई पर वसूली का सिस्टम खड़ा किया गया।
सरकार को 248 करोड़ का नुकसान
EOW अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में नई आबकारी नीति लागू कर विदेशी शराब सप्लाई का ठेका तीन निजी कंपनियों — ओम साई बेवरेज प्रा.लि., नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा.लि. और दिशिता वेंचर्स प्रा.लि. को दिया गया था। इन कंपनियों को लाइसेंस देने से राज्य सरकार को लगभग 248 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
EOW का कहना है कि घोटाले के पीछे कांग्रेस सरकार के दौरान बनाई गई नीतियों और सिंडिकेट की मिलीभगत रही।

