रायपुर।
खनिज विकास निधि (DMF) घोटाले में लिप्त रहे छत्तीसगढ़ के कई सप्लायरों में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच की आहट मिलते ही प्रदेशभर के बड़े प्रशासनिक अधिकारी ठेकेदारों और सप्लायरों के बीच डर का माहौल है। बताया जा रहा है कि ईडी जल्द ही डीएमएफ मद में हुए करोड़ों के फर्जी भुगतान और नियमविहीन खर्चों की जांच शुरू कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों में डीएमएफ के नाम पर कृषि उपकरण खरीदी ,सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा मद में लाखों रुपये के फर्जी बिल लगाकर भुगतान कराया गया। इनमें से कई सप्लायरों ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर योजनाओं की राशि का दुरुपयोग किया था।
हाल ही में राज्य सरकार ने डीएमएफ खर्चों की समीक्षा शुरू की है। इस बीच ईडी की संभावित जांच को लेकर पुराने सप्लायरों ने अपने खातों और दस्तावेजों को दुरुस्त करने की कोशिश शुरू कर दी है। कुछ ठेकेदारों ने तो विदेश यात्राएं तक स्थगित कर दी हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “डीएमएफ फंड का गलत उपयोग केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय गड़बड़ी का मामला है। इसमें ईडी के हस्तक्षेप की संभावना बनी हुई है।”
क्या है मामला
डीएमएफ (जिला खनिज प्रतिष्ठान) फंड से कृषि यंत्रों की खरीदी में हुए 550 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच की आंच अब मंत्रालय तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने कृषि विभाग के तीन पूर्व निदेशकों और एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी से दो दिन तक लगातार पूछताछ की है। फाइलों और भुगतान दस्तावेजों की जांच जारी है, जिससे जल्द ही और बड़े राजफाश की उम्मीद है। दावा किया जा रहा है कि जल्द ही घोटाले से जुड़े अफसरों के साथ ही कारोबारियों की गिरफ्तारी होगी।
ईडी की जांच में सामने आया है कि डीएमएफ मद से खरीदी गई कृषि सामग्रियों में भारी गड़बड़ी कर 600 करोड़ तक कमीशन का बंदरबांट किया गया। जांच एजेंसी ने राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम से जुड़े ठेकेदारों, सप्लायरों, बिचौलियों के साथ होटल मालिक, सीए, सराफा और दवा कारोबारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।
500-600 करोड़ कमीशन बांटने की आशंका
इस घोटाले की शुरुआत कोरबा जिले से मानी जा रही है, जहां वित्तीय वर्ष 2022-23 तक 2,000 करोड़ रुपये की डीएमएफ राशि प्राप्त हुई। इसमें से करीब 500-600 करोड़ रुपये केवल कमीशन के रूप में बंटने की आशंका जताई जा रही है। कृषि उपकरणों के अलावा निर्माण कार्य और खेल सामग्री की खरीदी में भी बड़े स्तर पर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।

