चक्रवात मोंथा मंगलवार शाम आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के पास तट से टकरा गया। मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच यह तूफान जमीन से टकराने के बाद कमजोर पड़ने लगा। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, अब यह उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और अगले कुछ घंटों में गहरे दबाव में तब्दील हो सकता है। इसका असर आंध्र प्रदेश के अलावा तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक देखने को मिल रहा है।
तूफान से अब तक बड़ी तबाही की खबरें हैं। आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले में एक उखड़े हुए ताड़ के पेड़ के गिरने से एक महिला की मौत हो गई। उधर, कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुँचा है। करीब 38 हजार हेक्टेयर में खड़ी फसलें और 1.38 लाख हेक्टेयर में बागवानी की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। कुल मिलाकर 1.76 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है।
आपदा से निपटने के लिए प्रशासन सक्रिय है। अब तक 76 हजार लोगों को सुरक्षित तौर पर राहत शिविरों में भेजा गया है। सरकार ने 219 मेडिकल कैंप और 865 टन पशु चारे की व्यवस्था की है। प्रभावित जिलों — कृष्णा, एलुरु और काकीनाडा — में रात 8:30 बजे से सुबह 6 बजे तक वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट दी गई है।
चक्रवात के चलते रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है। पूर्वी तटीय रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे ने सुरक्षा को देखते हुए 120 से अधिक ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट या पुनर्निर्धारित किया है। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार सुबह तक ओडिशा तट पर भी इसका असर दिखाई देगा।
