दंतेवाड़ा। आदिवासी विकास विभाग दंतेवाड़ा में 9.3 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया में अनियमितता और कूट रचना के आरोप में पुलिस ने दो पूर्व सहायक आयुक्त—डॉ. आनंद जी सिंह और केएल मसराम (सेवानिवृत्त) को गिरफ्तार कर सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपूर्वा डांगी की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
यह मामला वर्तमान सहायक आयुक्त राजीव कुमार नाग की लिखित शिकायत पर दर्ज हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) सहित छत्तीसगढ़ विनिर्दिष्ट भ्रष्ट आचरण निवारण अधिनियम 1982 की धारा 9 के तहत अपराध कायम किया है। वहीं तीसरा आरोपी, सहायक ग्रेड-2 संजय कोडोपी, अभी फरार है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
जिले में वर्ष 2021 से 2025 तक स्वीकृत भवन निर्माण कार्यों की जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति बनाई गई थी। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 6 निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। न तो किसी अखबार में विज्ञापन प्रकाशित किया गया और न ही ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किए गए।
जांच में पुष्टि
समाज प्रमुखों की शिकायत पर शुरू हुई इस जांच में यह साफ हो गया कि निविदा प्रक्रिया को अपारदर्शी तरीके से संचालित कर विभाग को करोड़ों का चूना लगाया गया।
👉 फिलहाल पुलिस की टीम फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई है और मामले की आगे की जांच जारी है।

