एक बार फिर किन्नर अखाड़ा और विवाद का रिश्ता गहरा गया है। अदाकारा ममता कुलकर्णी ने अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की मौजूदगी में ऐसा बयान दे दिया जिसने साधु-संतों तक को भड़का दिया।
संयुक्त प्रेसवार्ता में ममता ने कहा — “अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम आतंकवादी नहीं है, उसे गलत तरीके से पेश किया गया।”
बस, इतना कहना था कि देशभर में संत समाज में भूचाल आ गया।
संस्थापक का पत्र वायरल — पद से हटाई गईं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी
किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजयदास ने इस बयान के बाद कड़ा रुख अपनाया। उनका पत्र सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने लिखा है —
“ममता कुलकर्णी जैसी देशद्रोह से जुड़े मामलों वाली महिला को बिना परंपरा के महामंडलेश्वर बना देना धर्म और देशहित के खिलाफ है। मुझे मजबूरी में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को पदमुक्त करना पड़ रहा है।”
ऋषि अजयदास ने अखाड़े में चल रही गतिविधियों को “अवैधानिक” और “सनातन विरोधी” बताया है।
विवादों का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड
किन्नर अखाड़ा का विवाद कोई नया नहीं है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकुंभ से ही इस अखाड़े की राह विवादों में उलझी रही है।
शंकराचार्यों ने पहले ही अखाड़े की मान्यता पर आपत्ति जताई थी।
महाकुंभ में ममता कुलकर्णी के पट्टा अभिषेक को लेकर भी साधु-संतों ने विरोध दर्ज कराया था।
साधु-संतों ने जताई नाराजगी — ‘सनातन विरोधी गतिविधि’ बताया
अखिल भारतीय साधु-संत समिति के कार्यकारी अध्यक्ष महामंडलेश्वर अनिलानंद महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा —
“सनातन धर्म को बदनाम करने वाली ममता कुलकर्णी और किन्नर अखाड़ा को बाहर का रास्ता दिखाया जाए। ऐसे फर्जी महामंडलेश्वर पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
अब आगे क्या?
अब देखना होगा कि अखाड़ा परिषद इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है।
एक तरफ ममता कुलकर्णी का विवादित बयान और दूसरी ओर संस्थापक की बगावत — दोनों ने मिलकर किन्नर अखाड़े की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

