छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार का पहला मामला दर्ज, ओबीसी आयोग ने लिया संज्ञान

छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार का पहला मामला दर्ज, ओबीसी आयोग ने लिया संज्ञान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार से जुड़े पहले मामले में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग ने संज्ञान लेते हुए डडसेना कलार समाज के प्रांताध्यक्ष युवराज सिन्हा समेत दो अन्य पदाधिकारियों को तलब किया है। आयोग को लगातार सामाजिक बहिष्कार से जुड़ी शिकायतें मिल रही थीं, जिनमें एक छात्र ने अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत दर्ज कराई थी।

छात्रावास की समस्या उठाने पर किया बहिष्कार
मामले की शुरुआत तब हुई जब गौतम सिन्हा (परिवर्तित नाम) ने अपने छात्रावास में बिजली और पुताई जैसी समस्याओं को लेकर समाज के जिम्मेदार पदाधिकारियों से बात की। उन्होंने इन मुद्दों को समाज की बैठकों में भी उठाया। लेकिन इसके विरोध में छात्रावास अधीक्षक ने उनके कमरे के गेट में ताला लगा दिया, जिससे छात्र को बाहर रहना पड़ा। छात्र ने अगले दिन समाज के प्रमुखों से न्याय की मांग की, लेकिन कोई समाधान न मिलने पर उन्होंने ओबीसी आयोग में शिकायत दर्ज कर दी। आयोग ने 29 जनवरी 2025 को समझाइश देकर मामला खारिज कर दिया, लेकिन इसके बाद समाज के पदाधिकारियों ने छात्र को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

समाज पदाधिकारियों ने कमरे का ताला तोड़ा
छात्र का आरोप है कि आयोग से न्याय मांगने के कारण उन्हें जिला और पारिवारिक स्तर पर प्रताड़ना झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने पुनः आयोग में अपील कर जांच की मांग की। इसी बीच 31 मार्च 2025 को समाज पदाधिकारियों ने उनके कमरे का ताला और दरवाजा तोड़ दिया और उन्हें बाहर निकाल दिया। इन सभी घटनाओं पर छात्र ने ओबीसी आयोग में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आयोग ने त्वरित संज्ञान लेते हुए 4 अप्रैल 2025 (शुक्रवार) को समाज के प्रमुख पदाधिकारियों को तलब किया है। यह मामला प्रदेश में सामाजिक बहिष्कार से जुड़ा पहला केस है, जिस पर ओबीसी आयोग ने औपचारिक रूप से सुनवाई शुरू की है। अब यह देखना होगा कि आयोग क्या निर्णय लेता है और क्या पीड़ित छात्र को न्याय मिल पाता है।

Chhattisgarh