बस्तर में अब बंदूकों की गूंज नहीं, खेल के मैदान की आवाजें सुनाई दे रही हैं। माओवादी हिंसा के अंतिम चरण में पहुंच चुके इस क्षेत्र में आयोजित बस्तर ओलिंपिक शांति और बदलाव का नया प्रतीक बन गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस आयोजन को बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करने का प्रभावी माध्यम मान चुके हैं।
240 पूर्व माओवादी बने खिलाड़ी
कभी हथियार उठाने वाले 240 पूर्व माओवादी अब बैडमिंटन, फुटबॉल और अन्य खेलों में हिस्सा लेकर नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह आयोजन उन्हें सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का महत्वपूर्ण मौका दे रहा है। 13 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जगदलपुर में इन खिलाड़ियों से मिलकर माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने का संदेश देंगे।
प्रधानमंत्री ने भी की सराहना
बस्तर ओलिंपिक की सफलता की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई मंचों पर सराहना कर चुके हैं। लाल किले से स्वतंत्रता दिवस संबोधन और ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उन्होंने इस पहल को प्रेरणादायी बताया। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस आयोजन की निरंतर सफलता के पीछे प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री और खेल मंत्री अरुण साव तथा उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का समन्वित नेतृत्व अहम रहा है।
बस्तर आज बदलाव की राह पर है—जहाँ कभी बंदूकें थीं, अब खेलों की चमक और शांति का संदेश है।

