छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार ने अब आक्रामक मोर्चा खोल दिया है। कुछ महीने पहले जारी किए गए प्रेस नोट का असर अब मैदान में दिखने लगा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है — भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, और इस बार कोई दिखावा नहीं, बल्कि सीधा प्रहार।
राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब चार आईएएस अफसरों को एसीबी मुख्यालय बुलाकर घंटों पूछताछ की गई। इनमें सीजीएमएससी के घोटाले से जुड़े अफसर भी शामिल हैं — वर्तमान और पूर्व एमडी, पूर्व हेल्थ डायरेक्टर और एनएचएम की एमडी सभी से सख्त सवाल-जवाब हुए हैं।
सरकार के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि विधानसभा सत्र के बाद और भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। मुख्यमंत्री और उनके रणनीतिकारों का फोकस अब साफ है —
“2028 का चुनाव विकास से नहीं, ईमानदारी से जीता जाएगा।”
दरअसल, 2023 के चुनाव में करप्शन सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना था। अब सरकार उसी हथियार को जनता के भरोसे का प्रतीक बनाना चाहती है। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की तर्ज पर, हर साल कुछ “काले कौवों” को दिखाकर बाकी सिस्टम को डराने की रणनीति अपनाई जा रही है।
राज्य बनने के बाद पहली बार ऐसा माहौल दिख रहा है जब अफसरशाही में खलबली मची हुई है, मंत्री सतर्क हैं और सचिवालय तक में सन्नाटा पसरा है।
सरकार का संदेश बिल्कुल साफ —
“जो भी भ्रष्टाचार करेगा, अब बच नहीं पाएगा।”
छत्तीसगढ़ में अब ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ नारा नहीं, एक मिशन बन चुका है।

