– छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार को कड़े शब्दों में चेताया है। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश विभु दत्त गुरु की डिवीजन बेंच ने सरकार से सीधे पूछा—ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए आपका ठोस रोडमैप क्या है?
– कोर्ट ने कहा कि कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 में संशोधन की बातें लंबे समय से कही जा रही हैं, लेकिन जमीनी प्रगति नजर नहीं आ रही। महाधिवक्ता ने बताया कि समिति की बैठक हो चुकी है और संशोधन जल्द किए जाएंगे, लेकिन अदालत इससे संतुष्ट नहीं दिखी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने लेज़र लाइटिंग का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया। कोर्ट ने कहा कि त्योहारों और शादी समारोहों में इस्तेमाल हो रही लेज़र लाइटें लोगों की आंखों, खासकर रेटिना और कॉर्निया, को नुकसान पहुंचा रही हैं, लेकिन सरकार न तो कोई वैज्ञानिक डेटा पेश कर सकी और न ही इन लाइटों को नियंत्रित करने के लिए कोई नियम मौजूद हैं।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मुद्दा पहले भी उठाया गया था, लेकिन अभी तक न कोई अध्ययन हुआ और न किसी तरह का नियमन लागू किया गया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि लेजर लाइटिंग के प्रभावों पर वैज्ञानिक अध्ययन, प्रायोगिक डेटा और नियंत्रण के लिए प्रस्तावित नियम अगली तारीख पर प्रस्तुत किए जाएं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों की प्रगति रिपोर्ट भी पेश करने का आदेश दिया है।
अगली सुनवाई 12 दिसंबर 2025 को होगी।

