– छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बालोद जिले के एक जघन्य गैंगरेप और हत्या मामले में तीन दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
– मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि न्याय प्रक्रिया में वैज्ञानिक साक्ष्य सर्वोपरि हैं और गवाहों के मुकरने के बावजूद मजबूत डीएनए रिपोर्ट के आधार पर सजा कायम रखी जा सकती है।
अदालत ने कमलनारायण साहू, कमलेश कुमार श्रीवास और उत्तम कुमार रावाते की अपीलें खारिज कर निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाई।
यह मामला जून 2021 का है, जब ग्राम कोसमी में एक महिला का शव उसके घर में संदिग्ध हालत में मिला था। पोस्टमार्टम से सामने आया कि महिला की हत्या दम घोंटकर की गई थी और उससे पहले उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था।
जांच के दौरान पीड़िता के शरीर से लिए गए नमूनों और घटनास्थल से मिले जैविक अवशेषों का डीएनए मिलान आरोपियों से हो गया। बचाव पक्ष ने गवाहों के मुकरने और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि डीएनए साक्ष्य अपराध और आरोपी के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है और यही न्याय सुनिश्चित करने का मजबूत आधार है।

