छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर: दंतेवाड़ा में 71 माओवादी संगठन छोड़ मुख्यधारा में लौटे

छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर: दंतेवाड़ा में 71 माओवादी संगठन छोड़ मुख्यधारा में लौटे

दंतेवाड़ा। बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और शासन की पुनर्वास नीतियों का बड़ा असर दिखने लगा है। बुधवार 24 सितंबर को दंतेवाड़ा जिले में अब तक का सबसे बड़ा सरेंडर हुआ। कुल 71 माओवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें से 64 लाख के कुल 30 इनामी नक्सली शामिल हैं।

सरेंडर की अहम जानकारी

सरेंडर करने वालों में 21 महिला और 50 पुरुष माओवादी शामिल हैं।

बामन मड़काम (इनामी ₹8 लाख, डिप्टी कमांडर, पीपीसीएम)

मनकी उर्फ समीला मंडावी (इनामी ₹8 लाख, कंपनी-01 सदस्य)

शमिला उर्फ सोमली कवासी (इनामी ₹5 लाख, एसीएम, जनमिलिशिया कमांडर)

गंगी उर्फ रोहनी बारसे (इनामी ₹5 लाख, एसीएम, भामरागढ़ एरिया कमेटी)

संतोष मंडावी (इनामी ₹5 लाख, एसीएम, जनमिलिशिया कमांडर, कुतुल एरिया)

देवे उर्फ कविता माड़वी (इनामी ₹5 लाख, मेडिकल टीम कमांडर, बायपर एरिया)

किन घटनाओं में रहे शामिल?

बामन मड़काम 2012 दमपाया नक्सल कांड, 2014 दुगईगुड़ा हमला, 2021 अम्बेली वारदात, 2022 वेलगाड़रम हमला और 2024 गुंडम एनकाउंटर में शामिल रहा।

महिला नक्सली शमिला कवासी 2023 भैरमगढ़ मोबाइल टावर आगजनी और बोड़गा मुठभेड़ में शामिल रही।

अभियान का असर

दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय ने बताया कि “पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) और “लोन वर्राटू” (घर वापस आइये) अभियान का असर लगातार बढ़ रहा है।

पिछले 19 महीनों में दंतेवाड़ा जिले में 461 माओवादी, जिनमें 129 इनामी शामिल, सरेंडर कर चुके हैं।

लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 1113 माओवादी, जिनमें 297 इनामी, ने हथियार डाले हैं।

सरकार की ओर से मदद

सरेंडर करने वाले माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत:

₹50 हजार की तत्काल सहायता राशि

स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग

कृषि भूमि एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

दंतेवाड़ा में हुआ यह सामूहिक आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में लोन वर्राटू अभियान से और भी नक्सली मुख्यधारा में लौट सकते हैं।

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