रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाला मामले में गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया है। रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को रायपुर की अदालत ने जमानत दे दी है। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद अनिल टुटेजा को अभी जेल में ही रहना होगा, क्योंकि उन पर कस्टम मिलिंग स्कैम और शराब घोटाला जैसे अन्य मामलों में भी आरोप हैं।
अदालत में हुई पेशी
गुरुवार को दोनों रिटायर्ड अफसरों की रायपुर कोर्ट में पेशी हुई। अदालत ने नान घोटाले में दोनों को राहत देते हुए जमानत मंजूर की। जमानत आदेश के बाद आलोक शुक्ला को रिहा कर दिया गया और वे अपने घर लौट गए।
अनिल टुटेजा की मुश्किलें बरकरार
दूसरी ओर, अनिल टुटेजा की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। एसीबी की जांच में वे कस्टम मिलिंग घोटाले और शराब घोटाले के भी आरोपी हैं। इन मामलों में उन्हें अभी तक जमानत नहीं मिली है। इस वजह से उन्हें रायपुर सेंट्रल जेल भेजा गया है।
ED की चार सप्ताह की कस्टडी रही
गौरतलब है कि 22 सितंबर को दोनों अधिकारियों ने रायपुर कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें चार सप्ताह की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिमांड पर भेजा था। यह रिमांड अवधि दिल्ली मुख्यालय में पूरी की गई।
क्या है नान घोटाला
नान घोटाला छत्तीसगढ़ के नागरिक आपूर्ति निगम से जुड़ा वह बड़ा मामला है, जिसमें धान खरीदी और वितरण में करोड़ों रुपए की अनियमितताओं का आरोप है। इस केस में कई अफसरों और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और धनशोधन के आरोप लगे थे।
संक्षेप में:
आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को नान घोटाले में जमानत।
टुटेजा को अन्य मामलों के चलते जेल में रहना होगा।
आलोक शुक्ला को मिली रिहाई।
चार सप्ताह ED की कस्टडी में रहे दोनों अफसर।
