
स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर मां आनंदिनी फाउंडेशन के तत्वावधान में “सितारों की महफिल – गीतों की माला” शीर्षक से एक भावनात्मक, प्रेरणादायी और संस्कारों से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मूल भाव “धरती पे रूप मां-बाप का, उस विधाता की पहचान है” रहा, जिसमें संगीत के माध्यम से परिवारिक रिश्तों, गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन मूल्यों को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत गीतों और संगीत ने सहज, सरल और जीवन से जुड़े तथ्यों के माध्यम से श्रोताओं के मन और विचारों को गहरा मानसिक सुकून दिया। संगीत को “मानसिक औषधि” के रूप में परिभाषित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज संगीत हर उम्र, हर वर्ग की पसंद बन चुका है, जो तनाव, निराशा और अवसाद से उबरने का सशक्त माध्यम है।

मां आनंदिनी फाउंडेशन का उद्देश्य वर्तमान समय में बढ़ते परिवार विघटन, युवाओं में नशा, डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं के प्रति समाज को जागरूक करना और लोगों को पुनः जीवन जीने की प्रेरणा देना है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि परिवार, समाज, सरकार और राष्ट्र सेवा—सभी का मूल आधार सुदृढ़ पारिवारिक संस्कार ही हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री राजेश अग्रवाल एवं विशेष अतिथि भजन सम्राट श्री राम प्रसाद नेगी ने अपने विचार रखते हुए युवाओं को सही दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा ही देश का भविष्य है और उसे संस्कार, संगीत व सकारात्मक सोच से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
संस्था के संरक्षक श्री अमिताभ दुबे, प्रभारी आशा पाठक एवं अनामिका पांडे, अध्यक्ष डॉ. वंदना ठाकुर, सचिव ऐश्वर्या मिश्रा, सलाहकार दीपक शर्मा (सरायपाली) एवं श्री राजेन्द्र शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का कुशल संचालन एंकर श्री संजय शर्मा ने किया।

महफिल में मंजू शर्मा, मीनाक्षी केसरवानी, सागरिका ललित सिन्हा, कृष्णशेषगिरी राव जी, प्रदीप साहू, कृष्ण कुमार वर्मा जी, ममता देहरी, पल्लवी राव, गुरदीप कलसी और शाक्षी बजाज सहित कलाकारों ने अपनी सुमधुर आवाज से श्रोताओं का दिल जीत लिया। गीतों की स्वरांजलि के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा और परिवारिक रिश्तों में आए बदलावों पर सार्थक मंथन किया गया।

कार्यक्रम के अंत में मां आनंदिनी फाउंडेशन ने युवाओं और बच्चों को जीवन मूल्यों, संस्कारों और समाज सेवा की शपथ दिलाई। संदेश स्पष्ट था—
आज का युवा ही हमारे देश का भविष्य है, और उसका निर्माण संस्कार, संगीत और सकारात्मक सोच से ही संभव है।

