सरकार ने एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की सुरक्षा-अनुपालन जांच के लिए अस्थायी स्पेक्ट्रम आवंटन दे दिया है। कंपनी मुंबई, नोएडा, चंडीगढ़, हैदराबाद, कोलकाता और लखनऊ में डेमो स्टेशन स्थापित करेगी।
अधिकारियों के अनुसार स्टारलिंक ने 600 Gbps क्षमता के लिए आवेदन दिया है और परीक्षण के लिए 100 टर्मिनल आयात करने की अनुमति मिली है। फिलहाल केवल फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस का ट्रायल ही किया जा सकेगा — किसी भी तरह की व्यावसायिक सेवा देना प्रतिबंधित है।
सरकार ने कंपनी पर कड़े सुरक्षा नियम लागू किए हैं।
- टेस्टिंग के दौरान उत्पन्न सभी डेटा भारत में ही स्टोर करना होगा
- हर 15 दिन में लगाए गए टर्मिनलों का विवरण (यूजर, पता, लोकेशन) सरकार को देना होगा
- बिना अनुमति किसी भी तरह का उपयोग दंडनीय होगा
सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी
भारत में सैटकॉम को संवेदनशील सेक्टर माना जाता है। पिछले दिनों मणिपुर और अंडमान-निकोबार में गैर-कानूनी रूप से स्टारलिंक डिवाइस बरामद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ा रुख अपनाया था। मार्च में गृह मंत्रालय ने DoT से इस पर रिपोर्ट भी मांगी थी।
स्टारलिंक से पहले यूटेलसैट-वनवेब और जियो सैटेलाइट को भी इसी तरह सुरक्षा-अनुमोदन डेमो के लिए एयरवेव्स मिली हैं।
तीनों में से अभी किसी को भी अंतिम सुरक्षा मंजूरी नहीं मिली है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि
“पूर्ण स्पेक्ट्रम आवंटन तभी होगा जब कंपनी सभी सुरक्षा शर्तों का पालन कर लेगी और सरकारी नीतियों के अनुरूप पाए जाएगी।”

