नाबालिग़ लड़कियों के अंडाणु बेचने का धंधा…

नाबालिग़ लड़कियों के अंडाणु बेचने का धंधा…

नेपाल में नाबालिग (18 वर्ष से कम आयु की) लड़कियों के अंडाणु (ओवम) बेचने की जो घटना सामने आई है, वह पूरी तरह गैरकानूनी और नृशंस शोषण है। ऐसा करने वाले गैरकानूनी तंत्र के तहत मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं।


हालिया घटनाक्रम (2025 जुलाई)

नेपाल पुलिस की सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (CIB) ने एक बड़ा मामला उजागर किया जिसमें किशोर लड़कियों को वित्तीय प्रलोभन देकर उनके अंडाणु निकालकर बेचे जा रहे थे। आरोपितों में Hope Fertility and Diagnostic Pvt. Ltd. और Angel Fertility Clinic के कर्मचारी शामिल थे ।

आरोपितों ने आड़ में “फर्टिलिटी सहायता” का दावा किया, लेकिन किशोरियों को 9–10 दिनों तक होर्मोन गुड़ लेकर, फिर उन्हें सर्जरी के माध्यम से अंडाणु निकालने के लिए तैयार किया गया ।

मुल्य अंतर: युवतियों को सिर्फ लगभग रु 10,000–15,000 (भारतीय रूपये) दिए गए, जबकि बिचौलिए को रु 30,000–50,000 मिले और ग्राहक जोड़े तक रु 1.8–2 मिलियन तक चार्ज किए गए ।

कुछ आरोपित गिरफ्तार हुए थे—जिनमें तीन डॉक्टर (डॉ. असिम अधिकारि, डॉ. स्वस्ती शर्मा, डॉ. मनीला चौधरी), एजेंट (Justina Pradhan, Alisha Oli), और Angel Clinic से भी जुड़े लोग शामिल थे—लेकिन अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया और अभी भी जांच जारी है ।


कानूनी विफलता — जब तक कानून नहीं है, कार्रवाई नहीं

नेपाल में अंडाणु (ओवम) या शुक्राणु (स्पर्म) संग्रहण को लेकर कोई स्पष्ट और समर्पित कानून नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय में यह कहा गया कि ऐसे किसी भी प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाला कानून या नीति अभी तक नहीं बना है ।

मुख्य समस्या यह रही कि अंडाणु को “अंग” नहीं बल्कि “कोशिका” माना जाता है, इसलिए इसे अंग-तस्करी के तहत नहीं लिया गया। इसलिए, पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा अधिनियम (Children’s Act) के तहत कार्रवाई की पहल की—but इसके परिणामस्वरूप आरोपी न्यायिक हिरासत के बजाय जमानत पर बाहर हैं ।


मानवाधिकार और भावी कदम

ये घटनाएं मानव तस्करी या यौन शोषण के गंभीर रूप के अंतर्गत आती हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, बच्चों का शोषण, चाहे वह सेक्स ट्रैफिकिंग हो या शारीरिक अंगों का, अपराध है।

नेपाल की Human Trafficking Control Act, 1986 मानवशोषण और अंग-विक्रय (segue into human trafficking definitions) को अवैध घोषित करती है, जिसमें “मनुष्य का बेच-खरीद” समेत अंगों का अवैध दोहन दंडनीय है ।

वर्तमान में खालीपन का उपयोग करके क्लीनिक ऐसी अनैतिक गतिविधियां कर रहे हैं—इसलिए कड़े कानूनों की आवश्यकता है:

IVF और अंडाणु/शुक्राणु दान पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और कानूनी ढांचा।

अनिवार्य आयु सीमा (जैसे भारत में ≥21 वर्ष, विवाहित और पहले से माता होने जैसी शर्तें) ।

जांच योग्य प्रोटोकॉल, informed consent की स्पष्ट प्रक्रिया और गोपनीयता नियम।

क्या हुआ? किशोर लड़कियों से अंडाणु निकालकर बेचने की अवैध घटना।
भुगतान? लड़कियों को रु 10k–15k, बिचौलों को अधिक, क्लीनिक ग्राहकों से करोड़ों तक वसूलते थे।
कानूनी स्थिति? स्पष्ट कानून नहीं, केवल Children’s Act और मानव तस्करी अधिनियम पर आधारित कार्रवाई।
निष्कर्ष यह मानवीय और कानूनी रूप से अक्षम्य है। नेपाल में IVF और अंडाणु-दान पर सख्त विनियमन की आवश्यकता है।

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