रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक उपक्रमों और स्मार्ट सिटी मिशन की कार्यप्रणाली पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 16 दिसंबर को विधानसभा में पेश ऑडिट रिपोर्ट में नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) समेत कई उपक्रमों में कमजोर गवर्नेंस, वित्तीय अनुशासन की कमी और परियोजनाओं में भारी देरी उजागर हुई है।
कैग ने नवा रायपुर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को लेकर विशेष चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार प्रतिबंधात्मक निविदा शर्तों के कारण प्रतिस्पर्धा सीमित रही, जिसका नतीजा यह हुआ कि करीब 84 प्रतिशत कार्य एक ही ठेकेदार को सौंप दिए गए। इससे पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और कार्य गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्मार्ट सिटी मिशन की रफ्तार बेहद धीमी
रायपुर, बिलासपुर और नवा रायपुर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कुल 9,627 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं। लेकिन 2016-17 से 2022-23 के बीच केवल 2,644 करोड़ रुपये के ही कार्यादेश जारी हो सके, जो स्वीकृत लागत का महज 27 प्रतिशत है।
मार्च 2023 तक इनमें से भी सिर्फ 62 प्रतिशत कार्य पूरे हुए और वास्तविक व्यय 1,213 करोड़ रुपये तक ही सीमित रहा।
कैग के मुताबिक कार्यादेश जारी करने में देरी, समय पर स्थल उपलब्ध न कराना, बार-बार डिजाइन और कार्यक्षेत्र में बदलाव तथा कमजोर अनुबंध प्रबंधन के कारण परियोजनाओं की गति प्रभावित हुई। इसका असर यह हुआ कि केंद्र सरकार के अनुदान में कटौती हुई और राज्य के हिस्से के फंड में भी कमी आई।
निगरानी तंत्र रहा निष्क्रिय
ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्मार्ट सिटी मिशन की निगरानी के लिए गठित राज्य स्तरीय उच्चाधिकार समिति ने स्वीकृति के बाद नियमित समीक्षा नहीं की। स्मार्ट सिटी सलाहकार मंच की बैठकें समय पर नहीं हुईं और किसी भी विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) में पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति नहीं की गई।
तृतीय-पक्ष निगरानी व्यवस्था भी प्रभावी नहीं पाई गई।
सार्वजनिक उपक्रमों की वित्तीय सेहत चिंताजनक
मार्च 2023 तक राज्य में 28 सार्वजनिक उपक्रम थे, जिनमें से 26 कार्यरत रहे। सरकार का इन पर 7,579 करोड़ रुपये का निवेश है। जहां 10 उपक्रम लाभ में रहे, वहीं 7 उपक्रमों को 1,143 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। पांच बड़े उपक्रमों का संचयी घाटा 10,252 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
कैग की सिफारिशें
कैग ने घाटे में चल रहे उपक्रमों की त्वरित समीक्षा, खातों के समयबद्ध अंतिमकरण, कॉरपोरेट गवर्नेंस के सख्त पालन और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में पूर्णकालिक नेतृत्व के साथ मजबूत निगरानी तंत्र लागू करने की सिफारिश की है।
कैग की यह रिपोर्ट न केवल नवा रायपुर बल्कि पूरे स्मार्ट सिटी मिशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिस पर अब सरकार और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।

