छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मक्के की फसल के बीच छिपाकर की जा रही अवैध अफीम की खेती का बड़ा खुलासा हुआ है.जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के समोदा गांव में पुलिस और एफएसएल टीम की संयुक्त कार्रवाई में करीब 5 से 6 एकड़ जमीन पर उगाई जा रही अफीम की खेती पकड़ी गई है. प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इस अवैध फसल की कीमत लगभग एक करोड़ रुपये बताई जा रही है.
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि समोदा गांव के खेतों में मक्के की फसल के बीच मादक पदार्थ उगाया जा रहा है.सूचना मिलते ही एएसपी के नेतृत्व में एफएसएल टीम के साथ मौके पर दबिश दी गई.
जब खेत की बारीकी से जांच की गई तो मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे पाए गए। एफएसएल टीम ने मौके पर परीक्षण कर इसकी पुष्टि भी कर दी।
जांच के दौरान पुलिस ने मौके से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है।पूछताछ में उसने अवैध तरीके से अफीम उगाने की बात स्वीकार की है, हालांकि अब तक उसने खेती से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज पुलिस को नहीं दिखाया है।
बताया जा रहा है कि खसरा नंबर 310 ग्राम झेंझरी की करीब 9 एकड़ जमीन मधुमति ताम्रकार और प्रीतिबाला ताम्रकार के नाम पर दर्ज है, जहां मक्के के साथ अफीम की मिश्रित खेती की जा रही थी।
इस पूरे मामले की जानकारी सबसे पहले ग्राम समोदा के सरपंच अरुण गौतम को मिली थी।उन्होंने बताया कि उन्हें एक फोटो मिला जिसे गूगल पर सर्च करने पर पता चला कि वह अफीम का पौधा है। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
सर्पंच का आरोप है कि इस खेती में बृजेश ताम्रकार और विनायक ताम्रकार की भूमिका हो सकती है, जबकि जमीन उनकी बहन के नाम पर है। वहीं विनायक ताम्रकार ने दावा किया है कि उसने अपनी जमीन खेती के लिए किसी अन्य व्यक्ति को दी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में अफीम की खेती के संकेत मिले हैं और जमीन के मालिकों से पूछताछ की जा रही है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होते ही दोषियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दुर्ग जिले में इतने बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का यह पहला मामला सामने आने से प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है।

