छत्तीसगढ़ में अपराध और नशे का बढ़ता कहर, कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़ में अपराध और नशे का बढ़ता कहर, कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल

– छत्तीसगढ़ में नशाखोरी खुले तौर पर दिखाई दे रही है जिसके कारण बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने आम जनता में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

– छत्तीसगढ़ में हत्या, बलात्कार और चाकूबाजी जैसी गंभीर वारदातें रोज़मर्रा की घटना बनती जा रही हैं। हालात यह हैं कि राज्य की राजधानी में औसतन प्रतिदिन एक से दो हत्याएं दर्ज हो रही हैं। प्रदेश का शायद ही कोई शहर या कस्बा ऐसा बचा हो, जहां हर दिन किसी न किसी बड़ी आपराधिक घटना की खबर सामने न आ रही हो। इन परिस्थितियों ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
इसके साथ ही प्रदेश में नशे का अवैध कारोबार भी तेजी से फैलता जा रहा है। ड्रग्स, अफीम, गांजा, हीरोइन, नकली शराब और अवैध शराब की बिक्री गली-मोहल्लों से लेकर चौक-चौराहों तक खुलेआम हो रही है। नशीली वस्तुओं के इस बढ़ते नेटवर्क ने अपराध को और बढ़ावा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सूर्यास्त के बाद कई इलाकों में नशाखोरी खुले तौर पर दिखाई देती है, जिससे युवा वर्ग समेत समाज का हर तबका इसकी चपेट में आ रहा है और प्रदेश धीरे-धीरे नशे का अड्डा बनता जा रहा है।

कांग्रेस ने इस स्थिति के लिए केंद्र और राज्य सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि देश में पिछले 11 वर्षों से केंद्र में मोदी सरकार और लगभग दो वर्षों से राज्य में भाजपा की सरकार है, इसके बावजूद छत्तीसगढ़ तक सीमा पार से ड्रग्स की पहुंच होना गंभीर विफलता को दर्शाता है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि पाकिस्तान से आने वाले ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़े जाने के दावे किए गए थे, तो फिर यह नशा भारत के मध्य में स्थित छत्तीसगढ़ तक कैसे पहुंचा। जब स्मगलर सीमा पार कर ड्रग्स ला रहे थे, तब सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही थीं—यह एक बड़ा सवाल है।

कांग्रेस पार्टी ने गृह विभाग और पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश में कानून का राज समाप्त हो चुका है, गृह मंत्री केवल बयानबाजी तक सीमित हैं और गृह विभाग संभालने में विफल साबित हो रहे हैं। पुलिस पर अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए कहा गया है कि आम आदमी की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता नहीं रह गई है और सरकार ने पुलिस को उसके मूल कर्तव्यों से हटाकर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया है।

इसी बीच इस पूरे मामले पर पूर्व डीजीपी डी.एम. अवस्थी ने बताया प्रदेश में फैलते सूखे नशे (सिंथेटिक ड्रग्स) पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स पारंपरिक नशे से कहीं अधिक खतरनाक हैं, क्योंकि ये तेजी से युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेती हैं और अपराध की प्रवृत्ति को बढ़ाती हैं। अवस्थी ने नशे की सप्लाई चेन तोड़ने, सीमाओं पर सख्त निगरानी और स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन को मिलकर नशे के खिलाफ जागरूकता और रोकथाम की रणनीति अपनानी होगी।


कुल मिलाकर, बढ़ते अपराध और नशे ने छत्तीसगढ़ की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जनता में असुरक्षा का भाव गहराता जा रहा है और अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार इन हालात से निपटने के लिए ठोस और प्रभावी कदम कब उठाती है।

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