रायपुर। देशभर के साथ ही छत्तीसगढ़ में भी युवाओं के बीच नशे का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। कॉलेज और स्कूल स्तर पर ही बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नशे के लिए युवा अलग-अलग तरह के पदार्थों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनका सीधा असर उनकी सेहत, करियर और समाज पर पड़ता है।
कौन-कौन से नशे का इस्तेमाल करते हैं युवा?
- गांजा और चरस – आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवाओं में सबसे ज्यादा प्रचलित।
- ब्राउन शुगर और हेरोइन – अत्यंत खतरनाक और जानलेवा नशा।
- सिंथेटिक ड्रग्स (MD, LSD, कोकिन) – पार्टी कल्चर में तेजी से फैल रहे हैं।
- सिरप और टेबलेट्स – मेडिकल दवाइयों का गलत इस्तेमाल नशे के रूप में।
- सिगरेट और शराब – शुरुआती नशे के तौर पर सबसे आम।
नशे के इस्तेमाल से क्या होता है?
- शारीरिक नुकसान – लिवर, किडनी, फेफड़े और ब्रेन पर गंभीर असर।
- मानसिक प्रभाव – तनाव, अवसाद, भ्रम और आत्महत्या की प्रवृत्ति तक।
- पढ़ाई और करियर पर असर – ध्यान केंद्रित करने की क्षमता खत्म होती है, नशे की लत के कारण पढ़ाई व नौकरी प्रभावित।
- अपराध से जुड़ाव – नशे की जरूरत पूरी करने के लिए चोरी, लूटपाट और अन्य अपराधों की ओर रुझान।
- परिवार और समाज पर असर – रिश्तों में दरार, परिवार की आर्थिक स्थिति पर दबाव।
विशेषज्ञों की राय
नशामुक्ति केंद्रों से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि नशे की लत धीरे-धीरे जानलेवा साबित होती है। यह न केवल शरीर और दिमाग को बर्बाद करती है बल्कि समाज को भी अपराध और असुरक्षा की ओर धकेलती है।
प्रशासन की पहल
पुलिस और प्रशासन लगातार नशे के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं ताकि युवा शुरुआत से ही नशे से दूरी बना सकें।

