नारायणपुर, कभी नक्सलवाद, घने जंगलों और डर के साए में पहचाना जाने वाला अबूझमाड़ अब शांति, विकास और विश्वास की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में चर्चित रहे इस इलाके की छवि बदलने में अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन मील का पत्थर साबित हुई है। वर्ष 2019 में शुरू हुई यह पहल अब अपने पांचवें संस्करण तक पहुंच चुकी है, जिसका आयोजन 31 जनवरी को किया जाएगा।
मैराथन ने बदली अबूझमाड़ की तस्वीर
नक्सल प्रभाव खत्म करने के लिए पुलिस ने समय-समय पर अभियान चलाए, लेकिन इसके बावजूद लंबे समय तक अबूझमाड़ की पहचान एक पिछड़े और असुरक्षित क्षेत्र के रूप में बनी रही। इसी छवि को बदलने के उद्देश्य से जिला एवं पुलिस प्रशासन ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन की शुरुआत की। इसका मूल उद्देश्य स्पष्ट था—अबूझमाड़ को आतंक नहीं, बल्कि शांति, सौहार्द और खुशहाली के प्रतीक के रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना।
देश-विदेश से आए धावकों ने बढ़ाया भरोसा
पहले संस्करण में ही हजारों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। देश ही नहीं, विदेश से आए धावकों ने अबूझमाड़ की प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय लोगों की आतिथ्य परंपरा और बढ़ते सुरक्षित माहौल को नजदीक से देखा। यही वह क्षण था, जब अबूझमाड़ की बदलती तस्वीर वैश्विक मंच पर उभरने लगी। चार सफल संस्करणों के बाद यह आयोजन अब नारायणपुर जिले और अबूझमाड़ की नई पहचान बन चुका है।
पांचवां संस्करण: शांति की ओर बढ़ते कदम
31 जनवरी को आयोजित होने जा रहा पांचवां संस्करण कई मायनों में ऐतिहासिक होगा। पहली बार अबूझमाड़ के अंतिम छोर का व्यक्ति बिना किसी भय या संकोच के इस शांति दौड़ में शामिल होगा। सबसे खास बात यह है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे आत्मसमर्पित नक्सली भी इस मैराथन में हिस्सा लेंगे। कभी जिनका नाम खौफ का प्रतीक था, वही आज समाज और सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर शांति का संदेश देंगे।
सरेंडर्ड नक्सलियों का संदेश
आत्मसमर्पित नक्सली फागू राम उसेंडी ने कहा,
“आज मुख्यधारा में लौटकर पहली बार शांति के नाम दौड़ने का अवसर मिल रहा है। हम इस माध्यम से अबूझमाड़ के बदलाव का संदेश देश-दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं।”
सरेंडर्ड नक्सली नियमित रूप से मैराथन के लिए अभ्यास कर रहे हैं। उनका कहना है कि जंगलों में रहते हुए उन्होंने कभी इस आयोजन की भव्यता और उद्देश्य की कल्पना भी नहीं की थी। जिला प्रशासन भी उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और नई दिशा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
अबूझमाड़: डर से विश्वास तक का सफर
अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि यह उस बदलाव का प्रतीक है, जो एक समय आतंक से पहचाने जाने वाले क्षेत्र को शांति, विकास और भरोसे की राह पर आगे बढ़ा रहा है। यह दौड़ अबूझमाड़ की नई पहचान, नई उम्मीद और नए भविष्य का संदेश बन चुकी है।
