छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा ने कांग्रेस की प्रदेश इकाई में हाल की घटनाओं को आधार बनाकर अनुशासनहीनता के आरोप लगाए हैं। वहीं कांग्रेस ने जवाब में भाजपा पर पलटवार किया है।
भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “कांग्रेस में अनुशासन ही नहीं है, तो अनुशासन समिति क्या करेगी?” उन्होंने तंज कसा कि “कांग्रेसी आपस में ही गोलियां चला रहे हैं, हमले करा रहे हैं, ऐसे में समिति महज दिखावा है।”
कांग्रेस ने भी भाजपा के आरोपों का करारा जवाब दिया। पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने कहा कि “दिखावे की राजनीति करने वाली भाजपा हमें नसीहत न दे। बिलासपुर में भाजपा नेताओं की भिड़ंत बताती है कि भाजपा में संवादहीनता है और अंदरूनी कलह हावी है।”
इसी बीच अजय चंद्राकर ने कांग्रेस को “खत्म दल” बताते हुए कहा कि यह अब कमजोर विपक्ष बनकर रह गई है। उन्होंने कांग्रेस के “टैलेंट हंट” अभियान पर तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस में टैलेंट की नहीं, राजपरिवार के प्रति निष्ठा की जरूरत है। वहां संगठन, एकता या अनुशासन की बातें बेमानी हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों दल एक-दूसरे की कमजोरियों को भुनाने की कोशिश में हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में अनुशासन पर इतनी तल्ख बहस क्यों?

