रायपुर।
“मुझे नशा ख़रीदने के लिए पैसे दे दो, नहीं तो मैं अपनी जान दे दूंगा…” – ये किसी फिल्म का डायलॉग नहीं, बल्कि राजधानी रायपुर में नशे की गिरफ्त में आए एक युवक की असल कहानी है।
सफेद रंग के पाउडर की शक्ल में मिलने वाला यह नशा, जिसे चिट्टा कहा जाता है, छत्तीसगढ़ में धीरे-धीरे पैर पसार रहा है। इसकी एक ग्राम कीमत करीब 6 हज़ार रुपये है – यानी सोने से भी महंगा। युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेने वाला यह नशा सबसे खतरनाक इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसके सेवन के एक-दो बार बाद ही इंसान लत का शिकार हो जाता है।
क्या है चिट्टा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह एक सिंथेटिक ड्रग्स है, जिसमें हेरोइन और खतरनाक केमिकल्स मिलाकर तैयार किया जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, चिट्टा की लत छुड़ाने के लिए कई बार मरीजों को मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती तक करना पड़ता है।
कैसे फंसते हैं युवा?
पुलिस जांच में सामने आया है कि नशे का कारोबार करने वाले लोग स्कूल-कॉलेज के छात्रों को पहले मुफ्त में नशा देते हैं और जब वो आदी हो जाते हैं, तो उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। कई बार नशे के शिकार ही आगे दूसरों को फंसाकर अपना खर्चा निकालने लगते हैं।
समाजशास्त्री की राय
पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के समाजशास्त्र विभाग के एक प्रोफेसर का कहना है,
“छत्तीसगढ़ में तेजी से बदलती जीवनशैली, बेरोज़गारी और दिखावे की प्रवृत्ति युवाओं को नशे की ओर खींच रही है।”
“कई माता-पिता बच्चों को अत्यधिक लाड़-प्यार में छोड़ देते हैं, जिससे वे गलत रास्तों की तरफ बढ़ जाते हैं।”
पुलिस की सख्ती
राजधानी रायपुर, भिलाई, दुर्ग और बिलासपुर में पुलिस ने हाल के महीनों में कई पेडलर्स को गिरफ्तार किया है। बावजूद इसके, नशे का नेटवर्क लगातार सक्रिय है।
चुनौती समाज के सामने
चिट्टा सिर्फ एक नशा नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने को तोड़ने वाला जहर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते जागरूकता नहीं फैलाई गई तो यह आने वाली पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।

