आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति’, कब खत्म होगा नक्सलवाद, अमित शाह ने बताया फाइनल डेट

आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति’, कब खत्म होगा नक्सलवाद, अमित शाह ने बताया फाइनल डेट

– गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा को संबोधित करते हुए 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का वादा किया.

– गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा को संबोधित करते हुए 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का वादा किया. गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए अमित शाह ने मंत्रालय के काम को गिनाया. उन्होंने कहा कि, पिछले 10 साल में वो काम हुए हैं, जो आजादी के बाद अब तक नहीं हुए थे.

अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि, मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति है.उन्होंने राज्यसभा में आतंकवाद के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए पिछली सरकारों की आलोचना की. उन्होंने जम्मू कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा कि, अनुच्छेद 370 को हटाकर मोदी सरकार ने संविधान निर्माताओं के ‘एक संविधान, एक ध्वज’ के सपने को पूरा किया है.

क्या बोले अमित शाह…
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद हुए परिवर्तन के बारे में प्रश्न पूछने वाले विपक्षी नेताओं पर करारा प्रहार करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इसके समाप्त होने के बाद वहां आतंकवाद, पथराव, जबरदस्ती बंद की घटनाओं में भारी कमी आई है तथा राज्य में जितना निवेश आया, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ था.

वाम नक्सलवाद एवं पूर्वोत्तर के उग्रवाद, ये ‘तीन नासूर’…
शाह ने जम्मू कश्मीर एवं वहां के आतंकवाद, वाम नक्सलवाद एवं पूर्वोत्तर के उग्रवाद को ‘तीन नासूर’ की संज्ञा दी. शाह ने कहा कि अगर इन तीनों समस्याओं को जोड़ दिया जाए तो चार दशकों में देश के कुल 92 हजार नागरिक मारे गये.

उस समय की केंद्र सरकार को वोट बैंक का भी डर था…शाह ने कहा
उन्होंने कहा कि इन तीनों समस्याओं के लिए पहले ऐसे कभी सुनियोजित प्रयास नहीं किए गए जो नरेंद्र मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद किए हैं. गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पहले पड़ोसी देश से आतंकवादी सीमा पार कर आते थे और यहां धमाके करते थे, हत्याएं करते थे. उन्होंने कहा कि एक भी त्योहार ऐसा नहीं जाता था कि उसे लेकर चिंता नहीं की जाती थी.

वाम नक्सलवाद एवं पूर्वोत्तर के उग्रवाद, ये ‘तीन नासूर’…
शाह ने जम्मू कश्मीर एवं वहां के आतंकवाद, वाम नक्सलवाद एवं पूर्वोत्तर के उग्रवाद को ‘तीन नासूर’ की संज्ञा दी. शाह ने कहा कि अगर इन तीनों समस्याओं को जोड़ दिया जाए तो चार दशकों में देश के कुल 92 हजार नागरिक मारे गये.

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