छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दो ननों की गिरफ़्तारी ने धर्मांतरण और मानव तस्करी को लेकर सियासी तूल पकड़ लिया है। ये दोनों नन केरल की निवासी हैं, और उन पर कथित रूप से धर्मांतरण और मानव तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। इस मामले को लेकर अब रायपुर से दिल्ली और केरल तक राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज़ हो गई है।
क्या है मामला?
पुलिस ने इन ननों को एक शिकायत के आधार पर गिरफ़्तार किया था, जिसमें उनके ऊपर कुछ युवतियों को धार्मिक रूप से प्रभावित करने और कथित रूप से धर्मांतरण की प्रक्रिया में शामिल होने का आरोप था। पुलिस का कहना है कि जांच के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है।
सियासी बयानबाज़ी तेज़
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस गिरफ़्तारी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है और इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
उधर, केरल बीजेपी अध्यक्ष ने बयान दिया है कि इन ननों का धर्मांतरण या मानव तस्करी से कोई संबंध नहीं है और यह “एक प्रशासनिक भूल” है।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
दिल्ली में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
घटनास्थल पर पहुंचे राजनेता
मंगलवार को केरल भाजपा महासचिव अनूप एंटनी जोसेफ रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी नेताओं और स्थानीय प्रशासन से मुलाकात की।
वहीं, इंडिया गठबंधन के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल दुर्ग पहुंचा, जो ‘फैक्ट फाइंडिंग’ मिशन के तहत पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है।
आगे क्या?
इस संवेदनशील मुद्दे ने न सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता बल्कि कानून व्यवस्था, राजनीतिक ध्रुवीकरण और अंतर-राज्यीय संबंधों को भी केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस पर संसद से लेकर सड़क तक बहस और तेज़ होने की संभावना है।

