दिल्ली में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ व्यवस्था को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता कर रहे पीपी चौधरी ने बुधवार को समिति की बैठक के बाद बड़ा आर्थिक आकलन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से देश की अर्थव्यवस्था को सात लाख करोड़ रुपये तक की संभावित बचत हो सकती है।
पीपी चौधरी ने बताया कि बैठक में एक साथ चुनाव कराने और न कराने के आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के मुताबिक, इससे भारत की GDP पर लगभग 1.6% तक का सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, “अगर लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एकसाथ कराए जाएं, तो उससे प्रशासनिक खर्च, सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और अन्य संसाधनों पर भारी बचत हो सकती है। साथ ही इससे विकास कार्यों में रुकावट भी कम होगी।”
पीपी चौधरी ने यह भी जानकारी दी कि संयुक्त संसदीय समिति की अगली बैठक 11 अगस्त को होगी, जिसमें राजनीतिक विशेषज्ञों और सामाजिक वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया गया है। इस बैठक में सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं पर भी चर्चा की जाएगी।

