- स्कीम का उद्देश्य और जमीनी हकीकत
आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) को 2018 में मोदी सरकार ने इस वादे के साथ शुरू किया था कि ग़रीब और कमजोर तबके के लोगों को सालाना ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज देशभर के चुनिंदा सरकारी और निजी अस्पतालों में मिल सके।
कागज़ पर: इसमें 24,000 से ज़्यादा अस्पताल जुड़े बताए जाते हैं, जिनमें लगभग आधे निजी हैं।
जमीन पर: कई निजी अस्पताल इस योजना को या तो मानते ही नहीं, या फिर चुनिंदा प्रक्रियाओं के लिए ही मानते हैं। कई बार वे मरीज को यह कहकर लौटा देते हैं कि “पैकेज रेट कम है” या “क्लेम का पेमेंट अटकता है”।
- क्या यह “फेल” हो गई है?
तकनीकी रूप से: योजना बंद नहीं हुई, करोड़ों लोगों ने इसका लाभ भी लिया है, लेकिन
व्यवहारिक रूप से: अगर मरीज को इलाज के लिए अस्पताल ही न मिले, या निजी अस्पताल हाथ खड़े कर दें, तो यह लोगों के लिए “सफेद हाथी” जैसा बन जाता है—दिखने में बड़ा और ताकतवर, लेकिन असल में बोझ और बेकार।
इसका मुख्य कारण निजी अस्पतालों के साथ रेट और भुगतान को लेकर विवाद, क्लेम निपटान में देरी, और निगरानी की कमी है।
कुल खर्च और केंद्र सरकार की हिस्सेदारी
- कुल सरकारी खर्च (2025 तक)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, अब तक इस योजना पर कुल ₹1.25 लाख करोड़ खर्च हो चुका है।
- खर्च का विभाजन
इस योजना (PM-JAY) में खर्च का विभाजन आम तौर पर 60% केंद्र और 40% राज्य सरकारों के बीच होता है; उत्तर-पूर्वी राज्यों और कुछ विशेष क्षेत्रों में यह विभाजन 90 : 10 होता है।
इस आधार पर:
केंद्र का हिस्सा = ₹1.25 लाख करोड़ × 60% = ₹75,000 करोड़ (लगभग)
प्रति कार्ड आकर का अनुमान कैसे लगाया जाए?
- कितने कार्ड बनाए गए?
24 मार्च 2025 तक 36.9 करोड़ Ayushman कार्ड बनाए जा चुके थे।
यदि इस आधार पर केंद्र का सिर्फ लागत हिस्सा ही देखें:
प्रति कार्ड = ₹75,000 करोड़ ÷ 36.9 करोड़ कार्ड
लगभग ₹20,000 प्रति कार्ड
निष्कर्ष (संक्षेप में)
मापदंड विवरण
कुल खर्च ₹1.25 लाख करोड़ (सँभवतः)
केंद्र का हिस्सा लगभग ₹75,000 करोड़
कार्डों की संख्या 36.9 करोड़ कार्ड
अनुमानित खर्च/कार्ड लगभग ₹20,000 प्रति कार्ड
इस तरह, केंद्र सरकार की ओर से प्रत्येक आयुष्मान कार्ड पर अनुमानतः ₹20,000 खर्च हुआ है — यह केवल एक मोटा अनुमान है, क्योंकि इसमें कई मान्यताएं शामिल हैं:

