नई दिल्ली। विज्ञान और धर्म के बीच तालमेल को लेकर अक्सर बहस होती है, लेकिन कुरआन के कई उल्लेख ऐसे हैं जो आधुनिक साइंस की खोजों से मेल खाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे पांच अहम बिंदु, जिन्हें आज का विज्ञान साबित कर चुका है और जिनका ज़िक्र कुरआन में सदियों पहले मिल चुका है—
1️⃣ कायनात की पैदाइश (Big Bang)
कुरआन की सूरह अल-अंबिया (21:30) में कहा गया है कि “आसमान और ज़मीन जुड़े हुए थे, फिर हमने दोनों को अलग कर दिया।”
आधुनिक खगोल विज्ञान बताता है कि ब्रह्मांड की शुरुआत एक Singularity यानी Big Bang से हुई थी। यानी यह प्रक्रिया कुरआन में पहले ही दर्ज है।
2️⃣ ब्रह्मांड का फैलना (Expanding Universe)
सूरह अध्-धारियात (51:47) में लिखा है, “हम आसमान को लगातार फैलाते जा रहे हैं।”
साल 1929 में एडविन हबल की खोज से साबित हुआ कि यूनिवर्स लगातार फैल रहा है। यह आज का स्थापित वैज्ञानिक तथ्य है।
3️⃣ इंसान की तख़्लीक़ (Embryology)
सूरह अल-मुमिनून (23:14) में इंसान के भ्रूण विकास के चरणों का ज़िक्र है: नुत्फ़ा (drop), अलक़ा (clinging clot), और मुद्ग़ा (lump of flesh)।
आधुनिक Embryology भी यही बताती है कि भ्रूण इसी क्रम से विकसित होता है।
4️⃣ पहाड़ों का काम (Mountains as Pegs)
सूरह अन-नबा (78:7) में कहा गया है, “पहाड़ों को हमने खूंटों जैसा बनाया।”
जियोलॉजी आज साबित करती है कि पहाड़ों की जड़ें गहराई तक होती हैं, जो धरती को स्थिरता प्रदान करती हैं।
5️⃣ समुद्र की गहराई और रोशनी (Darkness in the Ocean Depths)
सूरह अन-नूर (24:40) में लिखा है कि “समंदर की गहराई में अंधेरे पर अंधेरे छाए रहते हैं।”
ओशनोग्राफी के मुताबिक 200 मीटर से गहराई में रोशनी नहीं पहुँचती और कई परतों में अंधेरा छाया रहता है।
निष्कर्ष:
1400 साल पहले उतारा गया कुरआन, जिन तथ्यों को बयान करता है, उन्हें आधुनिक विज्ञान ने हाल ही में खोजा है। यह तालमेल बताता है कि आस्था और विज्ञान विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
