छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के सबसे बदनाम अफ़सरों में गिने जाने वाले दागी अधिकारी एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। अरबों के घोटालों और जेल की हवा खाने के बाद अब वही अफ़सर मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) में तकनीकी सलाहकार बनने की लॉबिंग में जुटे है।
सूत्रों की मानें तो भ्रष्टाचार की काली दास्तान से भरी उनकी फाइल सीएम दफ्तर तक पहुंच चुकी है। सवाल यह है कि क्या सरकार इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी एक ऐसे अफसर को सौंपेगी, जिसके घर से 2016 में नकदी, ज़ेवर और अकूत संपत्ति बरामद हुई थी और जिसे जेल भी जाना पड़ा था?
अरपा नदी फ्लड वॉल घोटाला: सियासत में बदनुमा दाग
ये दागी अधिकारी के कार्यकाल का सबसे कुख्यात मामला बिलासपुर की अरपा नदी फ्लड वॉल है। 12 करोड़ की लागत से बनी यह दीवार पहली ही बाढ़ में जमींदोज़ हो गई। घटिया निर्माण सामग्री और ठेकेदारों से मिलीभगत कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। विपक्ष लगातार इस मामले को बड़ा घोटाला करार देता रहा है, मगर ये दागी अधिकारी कानूनी पेचों से बच निकले।
पहन्दा एनिकट: महज़ पांच साल में तबाही
6 करोड़ की लागत से बना पहन्दा एनिकट 5 साल में ही टूट गया। हाल की बाढ़ में किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। विधानसभा में विधायक अटल श्रीवास्तव ने इसे लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग की। यहां तक कि ठेकेदारी में दागी अधिकारी के भाई का नाम आने से इस पूरे मामले को पारिवारिक भ्रष्टाचार का शजरा कहा जा रहा है।
फर्जी सर्टिफिकेट और पुरानी फाइलें
अफसरों के बीच चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि ये दागी अधिकारी ने जमानत के लिए फर्जी विकलांगता सर्टिफिकेट का सहारा लिया था। एसीबी और ईओडब्ल्यू के केस अब भी लंबित हैं। बावजूद इसके उनकी वापसी के लिए कई बड़े नाम पर्दे के पीछे पैरवी कर रहे हैं।
सरकार की साख पर सवाल
अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर टिकी हैं। क्या वे एक ऐसे दाग़ी अफसर को दोबारा कुर्सी देकर विभाग की साख को दांव पर लगाएंगे या फिर अपनी ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर अडिग रहेंगे?
अगर यह फाइल पास होती है तो यह सरकार के लिए इम्तिहान साबित होगा और विपक्ष के हाथ में सरकार को घेरने का बड़ा हथियार सबीत होगा ।

