बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षा बलों ने माओवादियों की एक बड़ी साजिश को धराशायी कर दिया है। 13 अक्टूबर को ताड़पाला बेस कैंप से निकली कोबरा 206, सीआरपीएफ 229, 153 और 196 बटालियन की संयुक्त टीम ने KGH Foothills क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया। अभियान के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने सभी के होश उड़ा दिए।
दरअसल, कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर नक्सलियों ने भारी मात्रा में विस्फोटक और बम बनाने का सामान छिपा रखा था। सुरक्षा बलों को यहां से 51 जिंदा बीजीएल (बारूदी ग्रेनेड लॉन्चर), 100 बंडल एचटी एल्युमिनियम तार, 50 स्टील पाइप, 20 लोहे की शीट, 40 लोहे की प्लेट और बिजली के तारों का जखीरा मिला। इतना ही नहीं, जंगल में जवानों को पांच प्रेशर IED भी मिले, जिन्हें माओवादियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए बिछा रखा था। बीडीएस टीम ने मौके पर ही सभी IED को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर नष्ट कर दिया।
स्पष्ट है कि नक्सली किसी बड़े हमले की तैयारी में थे। लगातार सुरक्षा बलों की दबिश से बौखलाए नक्सली इस बार जवानों को भारी नुकसान पहुंचाने की फिराक में थे, लेकिन कोबरा और सीआरपीएफ के जवानों की सूझबूझ और फुर्ती से उनकी पूरी प्लानिंग धरी की धरी रह गई।
एसपी डॉ. जीतेन्द्र यादव ने इस संयुक्त ऑपरेशन की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्रवाई सुरक्षा बलों की सतत् सर्चिंग और इलाके में सक्रिय उपस्थिति का नतीजा है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक सफलता नहीं, बल्कि माओवादियों के विस्फोटक नेटवर्क पर सीधा वार है।”
बीजापुर के जंगल में चली इस सर्जिकल जैसी सर्च कार्रवाई ने नक्सलियों के मनोबल को झटका दिया है और इलाके में शांति व विश्वास का माहौल मजबूत किया है। एसपी ने बताया कि अब आसपास के इलाकों में सघन तलाशी अभियान और तेज किया जाएगा ताकि माओवादियों के मंसूबों को पूरी तरह जड़ से खत्म किया जा सके।
कुल मिलाकर – बीजापुर के जंगल में बारूद दफन था, लेकिन जवानों की सूझबूझ ने उसे फटने से पहले ही उड़ा दिया!

