रायपुर, — अपराधियों की धरपकड़ को तेज़ करने के लिए रायपुर पुलिस ने देश के आधुनिकतम तकनीकी सिस्टम का इस्तेमाल शुरू कर दिया है और अब उनके पास 3,000 से अधिक संदिग्धों की डिजिटल “क्राइम कुंडली” मौजूद है। इस डेटाबेस में हर आरोपी का नाम, फोटोग्राफ और आपराधिक इतिहास के साथ फिंगरप्रिंट (अंगुलियों के निशान) भी दर्ज हैं, जिससे घटनास्थल पर मिले प्रिंट का मिलान तुरंत किया जा सकता है।
क्या है नया सिस्टम और कैसे काम करता है
रायपुर क्राइम ब्रांच ने 2015 में अपराधियों की फाइलें बनाना शुरू किया था, पर तब केवल फोटो और नाम-पते तक सीमित था।
जनवरी 2022 में नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर आइडेंटिटी सिस्टम (एनएएफआइएस/नेफिस) के पायलट के बाद से फिंगरप्रिंट रिकॉर्डिंग डिजिटल रूप में शुरू हुई।
अब जेल भेजे जाने वाले हर अपराधी के फिंगरप्रिंट अनिवार्य रूप से लिए जा रहे हैं।
पुराने निगरानी में रखे गए संदिग्धों को थाने बुलाकर उनके फिंगरप्रिंट लिए जा रहे हैं और रिहा हुए पुराने अपराधियों की बायोमेट्रिक जानकारी भी रिकॉर्ड में जोड़ी जा रही है।
घटनास्थल पर मिले फिंगरप्रिंट सीधे नेफिस नेटवर्क में अपलोड कर दिए जाते हैं, जो देश के 18 राज्यों के पुलिस डेटाबेस से जुड़ा है — इससे राष्ट्रीय स्तर पर भी जांच त्वरित हो जाती है।
त्वरित सफलता — गिरफ्तारी के मामले
डिजिटल डेटाबेस के सहारे रायपुर पुलिस ने अब तक नागपुर, छिंदवाड़ा और गोवा से कई चोरों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। पुलिस का कहना है कि किसी भी वारदात के बाद घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट को सिस्टम में अपलोड करते ही संभावित आरोपी का मिलान निकल आता है, जिससे छानबीन और गिरफ्तारी दोनों तेज़ हो रहे हैं।
पुलिस का उद्देश्य और चुनौतियाँ
पुलिस का उद्देश्य अपराधियों का स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड बनाकर पुनरावृत्ति रोकना और क्षेत्रीय अपराधियों की भोेजकत कम करना है। हालांकि ऐसे सिस्टम के संचालन में बायोमेट्रिक डेटा की सुरक्षा, गोपनीयता और सुनिश्चित सटीकता जैसी चुनौतियाँ भी आती हैं — जिन्हें प्रशासन को देखते हुए तकनीकी तथा कानूनी ढांचे के साथ संभालना होगा।
क्या बदलेगा आम नागरिक के लिए?
नेफिस-जुड़े डिजिटल नेटवर्क से अपराधों की जाँच और दोषियों की पहचान तेज़ होगी, जिससे फौरी गिरफ्तारी और मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव होगा। साथ ही, सीमा पार या दूसरे राज्यों में चल रहे आपराधिक नेटवर्क का पता लगाना भी आसान होगा।
रायपुर क्राइम ब्रांच ने यह पहल राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपराध निगरानी की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। भविष्य में इस प्रणाली के और व्यापक उपयोग से इलाके की सुरक्षा में और मजबूती आने की संभावनाएँ हैं।

