
बस्तर–ओड़िशा राज्य कमेटी का प्रेस नोट: चंद्रन्ना के आत्मसमर्पण को ‘कपटपूर्ण दावा’, देवजी की महासचिव नियुक्ति का आरोप खारिज, केंद्रीय समिति की बैठक न होने का दावा
— बस्तर–ओड़िशा राज्य कमेटी के आधिकारिक प्रतिनिधि के नाम से जारी प्रेस नोट में गुरिल्ला/माओवादी संगठन के भीतर गंभीर असहमति और विचारधारा-स्तर पर मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। जारी प्रेस नोट (तिथि: 29.10.2025) में केंद्रीय समिति के सदस्य पुल्लुरी प्रसाद राव उर्फ़ चंद्रन्ना के हालिया आत्मसमर्पण और उनके अभिव्यक्तियों को ‘कपटपूर्ण’ करार दिया गया है और कुछ महत्वपूर्ण दावों को खुलकर खारिज किया गया है।
मुख्य बिंदु —
प्रेस नोट में कहा गया है कि संगठन “दीर्घकालीन जनयुद्ध के पथ पर आगे बढ़ने” की नीति पर कायम है और यह कि चंद्रन्ना के बयानों में झूठ और धोखा है।
नोट में प्रत्यक्ष तौर पर कहा गया है कि चंद्रन्ना द्वारा कथित रूप से कही गयी बात — “कॉमरेड देवजी को महासचिव चुना गया है” — पूरी तरह झूठा है; नोट आगे बताता है कि बसवराज (वसाव/बसव राजू) की शहादत के बाद केंद्रीय समिति की कोई बैठक आयोजित नहीं हुई। (प्रेस नोट के अंश उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए)।
प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि संगठन की केंद्रीय समिति की बैठकें व निर्णय-प्रक्रिया अभी कोई परिपक्व परस्थिति नहीं पायी हैं और केन्द्र सरकार के ‘ऑपरेशन्स’ के कारण हालात जटिल हैं।
प्रेस बयान के प्रमुख अंश
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी), ओडिशा राज्य समिति
दीर्घकालीन जनयुद्ध के पथ पर आगे बढ़ना हमारा रुख है!
*केंद्रीय समिति सदस्य चंद्रन्ना के झूठे प्रचार और कपटपूर्ण बयान का विरोध करें!!
“हमारे केंद्रीय समिति सदस्य, तेलंगाना राज्य समिति सचिव, कॉमरेड चंद्रन्ना ने 28 अक्टूबर 2025 को हैदराबाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।”
“उन्होंने कहा कि ‘मैं भविष्य में जनता के बीच काम करूंगा’, पर यह उनकी गिरफ्तारी की सच्चाई को छिपाने वाला एक मुखौटा मात्र है। उन्हें आत्मसमर्पण करने के बाद खुद को क्रांतिकारी कहने का कोई अधिकार नहीं है।”
“कॉमरेड चंद्रन्ना द्वारा यह कहना कि ‘कॉमरेड देवजी को महासचिव चुना गया है’ — यह पूरी तरह से झूठ है। हमारी पार्टी के महासचिव कॉमरेड बसवराज (वसव राजू) की शहादत के बाद केंद्रीय समिति की कोई बैठक नहीं हुई है।”
“वर्तमान परिस्थितियों में केंद्र सरकार ‘ऑपरेशन कगार’ के नाम पर गंभीर हमले कर रही है। ऐसे में केंद्रीय समिति की बैठक आयोजित करने की कोई स्थिति नहीं है।”
“भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन ने दीर्घकालिक जनयुद्ध में कई कठिनाइयों का सामना किया है। यह अस्थायी कठिन दौर है, लेकिन पार्टी इन मुश्किलों पर काबू पाकर आगे बढ़ रही है।”
“सरकारें बेरोजगारी, सामाजिक-आर्थिक असमानता और जनसमस्याओं का समाधान नहीं कर पाई हैं। इसलिए जनता संघर्ष और सशस्त्र विद्रोह के रास्ते पर जाने को मजबूर है।”
“अंतिम विजय जनता की होती है — यह ऐतिहासिक सत्य है।”
“हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं, जनता, शुभचिंतकों और क्रांतिकारी समर्थकों से अपील है कि वे सरकारों द्वारा पैदा की जा रही अराजकता के शिकार न बनें। हमें विश्वास है कि हमारी पार्टी इस कठिन परिस्थिति पर अवश्य विजय प्राप्त करेगी।”

