
नारायणपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को लगातार मिल रही सफलता के बीच आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया। दंडकारण्य के घने जंगलों में सक्रिय दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DSZC) के 28 कुख्यात और वर्दीधारी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।
इनमें से 19 महिला और 9 पुरुष माओवादी शामिल हैं, जिन सभी पर मिलाकर कुल 89 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
इनामी नक्सली भी शामिल
सरेंडर करने वालों में कुतुल एरिया कमेटी का खूंखार डीवीसी मेंबर दिनेश उर्फ पंडी भी शामिल है, जिस पर 8 लाख रुपए का इनाम था।
नक्सलियों ने पुलिस को INSAS रायफल, SLR, .303 बंदूक और भारी मात्रा में गोला-बारूद भी सौंपा।
कड़ी सुरक्षा में सरेंडर की प्रक्रिया
विशेष सुरक्षा प्रबंधों के बीच नक्सलियों को पुलिस बल के साथ नारायणपुर जिला मुख्यालय लाया गया।
सरेंडर कार्यक्रम के दौरान बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी और नारायणपुर एसपी रॉबिनसन गुड़िया मौजूद रहे।
“पूना मार्गेम” नीति का प्रभाव
सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ सरकार की “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” नीति से प्रभावित होकर हिंसा छोड़ रहे हैं।
सरकार आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षा, आर्थिक सहायता, पुनर्वास और कानूनी सहायता उपलब्ध करा रही है।
परिजनों ने दी नई शुरुआत की शुभकामनाएं
समर्पण कार्यक्रम के दौरान सरेंडर नक्सलियों के परिवारजन भी मौजूद रहे।
समाज के प्रमुख लोगों ने उन्हें प्रतीक स्वरूप पौधा भेंट किया, और कहा—
“इस पौधे की तरह आपकी नई जिंदगी भी बढ़े और खुशहाल हो।”
सरेंडर की बढ़ती रफ्तार और नक्सलवाद का भविष्य
पिछले एक वर्ष में बस्तर संभाग में लगातार बड़े स्तर पर सरेंडर हो रहे हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया है।
लगातार आत्मसमर्पण और शीर्ष कमांडरों के ढेर होने से माओवादी संगठन अब बिखराव और संसाधन संकट का सामना कर रहा है।
हाल के महत्वपूर्ण सरेंडर (2025):
तारीख जिला आत्मसमर्पण संख्या विशेष जानकारी
17 अक्टूबर बस्तर 210 9.18 करोड़ का इनाम
29 अक्टूबर बीजापुर 51 9 महिला शामिल
15 अक्टूबर सुकमा 27 16 पर 50 लाख इनाम
8 अक्टूबर नारायणपुर 16 10 इनामी
24 सितंबर दंतेवाड़ा 71 21 महिलाएं
30 अक्टूबर कोंडागांव 3 1 लाख की महिला नक्सली शामिल
नारायणपुर में आज हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण ने दंडकारण्य में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है।
सरेंडर की यह श्रृंखला बताती है कि नक्सल संगठन अब अपने सबसे कमजोर दौर में है और बस्तर शांति के नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है।
यह बस्तर के लिए सिर्फ सुरक्षा सफलता नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत है।

