नक्सलगढ़ नहीं, आधुनिक खेती का गढ़ बन रहा बस्तरATM मॉडल से बदला किसानों का जीवन, हर 15 दिन में मिल रही स्थायी आमदनी

नक्सलगढ़ नहीं, आधुनिक खेती का गढ़ बन रहा बस्तरATM मॉडल से बदला किसानों का जीवन, हर 15 दिन में मिल रही स्थायी आमदनी

दंतेवाड़ा। कभी नक्सल हिंसा और पिछड़ेपन के लिए पहचान रखने वाला बस्तर अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। गांवों में विकास, सड़कें, शिक्षा और अब आधुनिक खेती का विस्तार तेजी से हो रहा है। इसी परिवर्तन की कड़ी में दंतेवाड़ा जिले में खेती का नया मॉडल चर्चा में है—ATM खेती मॉडल, जिसने किसानों की आय और कृषि पद्धतियों को बदलना शुरू कर दिया है।


30 किसानों को मिला विशेष प्रशिक्षण

जैविक जिला दंतेवाड़ा में प्रशासन और कृषि विभाग जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गांव-गांव अभियान चला रहा है। इसी प्रयास में 30 चयनित किसानों को ATM मॉडल पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

कृषि विभाग के मार्गदर्शन में ये किसान अब एक छोटी जमीन पर तीन से चार फसलों की मल्टी-लेयर खेती कर रहे हैं और कम समय में अच्छी कमाई प्राप्त कर रहे हैं।


क्या है ATM खेती मॉडल?

ATM मॉडल असल में Continuous Return Farming System है। इसे ATM इसलिए कहा जाता है क्योंकि जैसे बैंक से कभी भी पैसा निकाला जा सकता है, उसी तरह इस मॉडल में किसान हर 15–20 दिन में फसल बेचकर आय प्राप्त कर सकते हैं।

इसी खेत में एक साथ लगाई जाती हैं—

✔ पत्तेदार फसलें: पालक, मेथी, लाल भाजी, धनिया (15–20 दिन में तैयार)
✔ जड़ वाली सब्जियां: मूली, गाजर, चुकंदर (20–25 दिन में तैयार)
✔ मुख्य सब्जियां: टमाटर, बैंगन, मिर्च—जो बाद में अतिरिक्त आमदनी देती हैं।


फायदे जो बना रहे इसे किसानों की पहली पसंद

हर 15–20 दिन में नियमित आमदनी

कम जमीन पर अधिक उत्पादन

जोखिम कम, क्योंकि कई फसलें एक साथ

सालभर रोजगार और सब्जी उपलब्धता

रासायनिक खादों के बजाय जैविक उपयोग

यह मॉडल दक्षिण भारत में पहले से लोकप्रिय था, अब बस्तर इसका नया केंद्र बन रहा है।


बस्तर में तेजी से विस्तार

कृषि विस्तार अधिकारी सूरज पंसारी के अनुसार,
“ATM मॉडल किसानों की नियमित कमाई का सबसे प्रभावी तरीका साबित हो रहा है। दक्षिण भारत में सफल होने के बाद अब दंतेवाड़ा में भी यह तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। किसानों को तकनीकी सहायता, जैविक विधि और प्रशिक्षण लगातार दिया जा रहा है।”


किसानों के चेहरे पर मुस्कान

विजम गांव सहित कई इलाकों में किसानों ने इस मॉडल को अपनाया है। पहले जहां किसान मौसम और बाजार पर निर्भर रहते थे, वहीं अब सालभर खेत से उत्पादन और बिक्री करके आत्मनिर्भर बन रहे हैं।


बदल रही है पहचान

दंतेवाड़ा और पूरा बस्तर अब सिर्फ नक्सलगढ़ नहीं, बल्कि
“आधुनिक खेती और जैविक उत्पादन का नया हब” बनकर उभर रहा है।

ATM खेती मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि बस्तर के भविष्य की एक नई कृषि क्रांति की नींव भी रख रहा है।

Chhattisgarh