ट्रंप का बयान: “थर्ड वर्ल्ड के नागरिकों की एंट्री पर स्थायी रोक” — लेकिन थर्ड वर्ल्ड आखिर है क्या?

ट्रंप का बयान: “थर्ड वर्ल्ड के नागरिकों की एंट्री पर स्थायी रोक” — लेकिन थर्ड वर्ल्ड आखिर है क्या?

वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के पास हुए हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि वह थर्ड वर्ल्ड यानी तीसरी दुनिया के देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर स्थायी प्रतिबंध लगा देंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि थर्ड वर्ल्ड किन देशों को कहा जाएगा और यह पाबंदी किन पर लागू होगी।

इसके बाद यह सवाल उठ रहा है— आख़िर थर्ड वर्ल्ड क्या है? क्या भारत भी इसमें आता है?


थर्ड वर्ल्ड शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

“थर्ड वर्ल्ड” शब्द की कोई स्पष्ट भौगोलिक या आधिकारिक परिभाषा नहीं है। इसे आमतौर पर उन देशों के लिए इस्तेमाल किया जाता था जो गरीब, विकासशील या पिछड़े माने जाते थे।

1952 में फ्रांस के डेमोग्राफ़र अल्फ़्रेड सॉवी ने पहली बार इस शब्द का उपयोग किया। उन्होंने इसका संदर्भ शोषित और उपेक्षित देशों से जोड़ा— ठीक वैसे ही जैसे फ्रांसीसी समाज में तीसरा वर्ग (आम जनता) पादरियों और कुलीनों द्वारा शोषित था।


शीत युद्ध के समय तीन वर्ग बने:

वर्ग मतलब नेतृत्व

पहली दुनिया पूंजीवादी देश अमेरिका
दूसरी दुनिया कम्युनिस्ट देश सोवियत संघ
तीसरी दुनिया वे देश जो किसी भी गुट में शामिल नहीं थे गुट–निरपेक्ष राष्ट्र

इसी तीसरे समूह को थर्ड वर्ल्ड कहा गया। इनमें ज्यादातर देश यूरोप के पूर्व उपनिवेश थे जो अभी विकास के शुरुआती चरण में थे।

अब परिभाषा बदल चुकी है

आज की दुनिया में “थर्ड वर्ल्ड” शब्द को पुराना और राजनीतिक रूप से गलत माना जाता है। अब ऐसे देशों को इन नामों से पहचाना जाता है:

ग्लोबल साउथ

विकासशील देश

उभरती अर्थव्यवस्थाएं

निम्न और मध्यम आय वाले देश

क्या भारत थर्ड वर्ल्ड में आता है?

ऐतिहासिक दृष्टि से: हाँ, भारत गुट–निरपेक्ष आंदोलन का सदस्य था, इसलिए उस दौर में भारत थर्ड वर्ल्ड देशों की श्रेणी में आता था।

आर्थिक दृष्टि से आज: नहीं।
भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक मंच पर एक उभरती शक्ति माना जाता है।

हालांकि भारत में आर्थिक असमानता अब भी बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष

ट्रंप के बयान के बाद यह चर्चा फिर से तेज हो गई है कि आखिर किस आधार पर किसी देश को “थर्ड वर्ल्ड” कहा जाएगा। चूंकि इस शब्द की कोई आधिकारिक या अंतरराष्ट्रीय परिभाषा नहीं है, इसलिए विशेषज्ञ ट्रंप की घोषणा को धुंधली, अस्पष्ट और विवादास्पद मान रहे हैं।

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