इस्लामाबाद।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक़ डार ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के बेहद करीब पहुंच चुका था, लेकिन क़तर की दखलअंदाज़ी के बाद इस ऑपरेशन को रोक दिया गया।
एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसहाक़ डार ने कहा कि अफ़ग़ान तालिबान को अपनी नीतियों पर फिर से विचार करना चाहिए क्योंकि वह अब सत्ता में हैं। डार के अनुसार, तालिबान सरकार के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान में हिंसक घटनाओं में वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा,
“हम उनसे कुछ नहीं चाहते, लेकिन जब हमारी सेना और सुरक्षा बलों के चार हज़ार जवान मारे गए और 20 हज़ार घायल हुए, तो हम चुप कैसे रह सकते हैं?”
डार ने आगे बताया कि पाकिस्तान द्वारा अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के अंदर अभियान की तैयारी की जानकारी क़तर सरकार को मिल गई थी। इसके बाद क़तर ने तत्काल संपर्क कर स्थिति को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने का प्रस्ताव दिया।
उन्होंने कहा,
“क़तर के विदेश मंत्रालय का लगातार हमसे संपर्क था। उसी रात होने वाला ऑपरेशन क़तर के अनुरोध पर रोक दिया गया, लेकिन मध्यस्थता के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।”
इसहाक़ डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के पास कार्रवाई करने की ताक़त है, लेकिन पड़ोसी देश पर हमला करना सही समाधान नहीं है।
तनाव लगातार बढ़ रहा है
हाल के दिनों में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के संबंधों में तनाव तेजी से बढ़ा है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफ़ग़ानिस्तान की जमीन से पाकिस्तान में आतंकी हमले किए जा रहे हैं।
कुछ दिनों पहले इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान ने सुरक्षा को लेकर और भी कड़ा रुख अपनाया है।
फिलहाल पाकिस्तान- अफ़ग़ानिस्तान के रिश्ते बेहद नाज़ुक दौर से गुजर रहे हैं और कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद तनाव कम होता नहीं दिख रहा।

