नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है और इसके पहले दिन से ही तीखी राजनीतिक टकराहट के आसार हैं। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), दिल्ली में हुए आत्मघाती विस्फोट और दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके प्रदूषण मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की है। ऐसे में उम्मीद है कि सत्र हंगामेदार रहेगा।
वहीं सरकार ने 19 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में 13 महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी की है। इनमें असैन्य परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी का रास्ता खोलने वाला एटॉमिक एनर्जी बिल, कॉर्पोरेट कानूनों में सुधार, दिवालियापन कानून संशोधन, हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल और हेल्थ व नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा सेस बिल शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह 10 बजे संसद के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित करेंगे और सत्र में सरकार की विकास प्राथमिकताओं को साझा करेंगे।
15 बैठकों वाला सत्र, विपक्ष सरकार को घेरेगा
इस सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। बिहार चुनाव में भारी जीत के बाद मोदी सरकार आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों को गति देने की तैयारी में है।
रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने सुचारू सत्र चलाने का आग्रह किया। लेकिन विपक्ष ने साफ कहा कि एसआईआर, राजधानी के प्रदूषण और हालिया आतंकी हमले पर चर्चा होनी ही चाहिए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इन मुद्दों को सरकार नजरअंदाज कर रही है।
बैठक में 36 दलों के 50 नेता शामिल
सर्वदलीय बैठक में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस, तृणमूल, द्रमुक, सपा, राजद और माकपा सहित कई दलों ने हिस्सा लिया।
विधेयक की प्रमुख सूची
जन विश्वास (संशोधन) बिल
इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड संशोधन
कॉर्पोरेट लॉज संशोधन बिल
एटॉमिक एनर्जी बिल
सिक्योरिटीज मार्केट कोड बिल
आर्बिट्रेशन एंड कंसीलिएशन संशोधन
हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल
हेल्थ व नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल
इंश्योरेंस कानून संशोधन आदि
विपक्ष बनाम सरकार
कांग्रेस सांसद तरुण गोगोई ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया “वोट चोरी” की साजिश है और लाखों मतदाता सूची से गायब हैं। वहीं सरकार ने दावा किया कि यह निर्वाचन आयोग का प्रशासनिक अधिकार है और इसपर संसद में चर्चा लागू नहीं होती।
सरकार ने कहा—
“हम संविधान के दायरे में हर विषय पर चर्चा को तैयार हैं, विपक्ष सकारात्मक सहयोग करे।”
— किरेन रिजिजू, संसदीय कार्य मंत्री
शीतकालीन सत्र की शुरुआत विकास एजेंडे और तीखे राजनीतिक विवादों के बीच हो रही है। एक ओर सरकार सुधारों को आगे बढ़ाना चाहती है, तो दूसरी ओर विपक्ष सुरक्षा चूक, पर्यावरण संकट और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए तैयार है।

