बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि जहां 2020 में आरजेडी को 75 सीटें मिली थीं, वहीं इस बार संख्या घटकर 25 कैसे रह गई? इस पर तेजस्वी यादव ने चुनाव परिणामों पर असहमति जताते हुए कहा—
“ये बात कोई भी, खासकर बिहार की जनता पचा नहीं पा रही है। इस चुनाव में लोकतंत्र हारा है, मशीनरी जीती है.”
तेजस्वी यादव ने ईवीएम पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि जनता बदलाव चाहती थी, लेकिन मशीनों ने बदलाव स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा—
“ईवीएम बदलाव नहीं चाहता था, बैलेट चाहता था। इसका कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है, लेकिन मैं महसूस कर सकता हूं कि अदृश्य शक्तियों ने अपना काम किया है।”
“अभी यह सामने नहीं आ रहा कि क्या हुआ है, लेकिन आने वाले समय में जरूर पर्दाफाश होगा।”
चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप
तेजस्वी यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
“चुनाव आयोग पूरी बेईमानी के मोड में था। चुनाव आयुक्त पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती, इसके लिए कानून भी बदला गया। क्यों बदला गया? यानी कुछ गड़बड़ होने वाली थी।”
तेजस्वी के मुताबिक, जब चुनाव आयोग ने तारीख़ों की घोषणा की, उसके सिर्फ तीन घंटे पहले सरकार की योजनाओं के पैसे जारी किए गए, जिसके बाद आचार संहिता लागू हुई।
राजनीतिक हलचल तेज
तेजस्वी यादव के इन बयानों के बाद बिहार की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।
जहां विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों को तथ्यहीन और हताशा की प्रतिक्रिया बता रहा है।

